पटना (अपना नालंदा)। मानसिक स्वास्थ्य और मनोचिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों के लिए पटना में दो दिवसीय विशेष साइकोथेरेपी वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है। वर्ल्ड साइकियाट्रिक एसोसिएशन (WPA), जोन-15 के सहयोग से AIIMS पटना के मनोरोग विभाग द्वारा 5 और 6 सितंबर 2026 को “Understanding Emotions: A Psychoanalytical Approach” विषय पर इस विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध मनोविश्लेषक, लेखक और समकालीन मनोविश्लेषणात्मक चिंतन के प्रमुख विशेषज्ञ प्रो. सलमान अख्तर मुख्य विशेषज्ञ के रूप में शामिल होंगे। इस आयोजन में देशभर के मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ दक्षिण एशिया के अर्ली-कैरियर मनोचिकित्सकों की भी भागीदारी होगी। आयोजकों को उम्मीद है कि भारत और दक्षिण एशिया से 300 से अधिक मनोचिकित्सक एवं मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर इस कार्यशाला में शामिल होंगे।
भावनाओं की गहराई को समझने पर रहेगा जोर
इस दो दिवसीय कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच साइकोथेरेपी की शिक्षा और क्लिनिकल प्रैक्टिस को और मजबूत करना है। कार्यशाला के दौरान मरीजों की भावनाओं, उनके व्यवहार, आपसी संबंधों और जीवन के अनुभवों को मनोविश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से समझने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों द्वारा इस बात पर चर्चा की जाएगी कि किसी व्यक्ति की भावनाएं उसके व्यक्तित्व, लगाव, रिश्तों, मानसिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित करती हैं। मरीज के उपचार में केवल उसके लक्षणों पर ध्यान देने के बजाय उसकी भावनात्मक दुनिया और उसके संबंधों को समझने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
प्रेम से लेकर क्रोध, अपराधबोध और आशा तक पर चर्चा
वर्कशॉप के दौरान मानव जीवन की कई महत्वपूर्ण भावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। इनमें प्रेम, दर्द, क्रोध, घृणा, अपराधबोध, क्षमा और आशा जैसी मूल भावनाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं।
विशेषज्ञ यह समझने का प्रयास करेंगे कि ये भावनाएं व्यक्ति के व्यवहार और रिश्तों को किस तरह प्रभावित करती हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भावनात्मक अनुभवों को समझकर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के उपचार और साइकोथेरेपी की प्रक्रिया को किस प्रकार अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रो. सलमान अख्तर होंगे मुख्य विशेषज्ञ
कार्यशाला में मुख्य विशेषज्ञ के तौर पर शामिल हो रहे प्रो. सलमान अख्तर को समकालीन मनोविश्लेषणात्मक चिंतन में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाना जाता है। उनके कार्यों में भावनाओं, मानवीय रिश्तों, व्यक्तित्व और मनोविकृति जैसे विषयों को विशेष महत्व दिया गया है।
उनकी विशेषज्ञता के माध्यम से प्रतिभागियों को मनोविश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और साइकोथेरेपी की क्लिनिकल उपयोगिता को समझने का अवसर मिलेगा।
देशभर से विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद
आयोजकों के अनुसार कार्यशाला में भारत और दक्षिण एशिया के विभिन्न हिस्सों से 300 से अधिक मनोचिकित्सकों, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों तथा साइकोथेरेपी में रुचि रखने वाले विशेषज्ञों के शामिल होने की उम्मीद है।
कार्यक्रम से WPA South Asia के डॉ. विनय कुमार तथा AIIMS पटना के मनोरोग विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. पंकज जुड़े हैं। वहीं WPA जोन-15 के अर्ली-कैरियर मनोचिकित्सकों डॉ. आस्था शर्मा, डॉ. निहाल, डॉ. काश्यपी और डॉ. अपर्णा का भी आयोजन को सफल बनाने में सहयोग रहेगा।
‘सर्कल ऑफ होप’ बनेगी कार्यशाला की थीम
दो दिवसीय वर्कशॉप की थीम ‘सर्कल ऑफ होप’ रखी गई है। इस थीम के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मानवीय और व्यक्ति-केंद्रित बनाने की दिशा में विचार किया जाएगा।
आयोजकों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उपचार में मजबूत भावनाओं को समझना, मरीजों के साथ बेहतर चिकित्सकीय संबंध स्थापित करना और उनके रिश्तों में सुधार की संभावनाओं को तलाशना बेहद महत्वपूर्ण है। ‘सर्कल ऑफ होप’ इसी विचार को आगे बढ़ाने का प्रयास है—जिसका लक्ष्य मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे लोगों के जीवन में फिर से विश्वास, संबंध और उम्मीद को मजबूत करना है।
साइकोथेरेपी के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव साझा करने का मंच
यह कार्यशाला मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए अपने अनुभव साझा करने, नई मनोचिकित्सकीय अवधारणाओं को समझने और क्लिनिकल प्रैक्टिस को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है। विशेष रूप से अर्ली-कैरियर मनोचिकित्सकों को अनुभवी एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों से सीखने और संवाद करने का अवसर मिलेगा।
पटना में आयोजित होने वाली यह कार्यशाला मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में साइकोथेरेपी की भूमिका को मजबूत करने के साथ-साथ मरीजों की भावनात्मक जरूरतों को अधिक संवेदनशीलता और गहराई से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।







