आलेख —
प्रो. श्याम नंदन प्रसाद, पर्यावरणविद् एवं पूर्व प्राचार्य, सिटी एंबेसडर ऑफ पटना, विकसित भारत अभियान @ 2047 (GLF)
प्रो. नंदीपति तिवारी, जंतु विशेषज्ञ, पटना, बिहार, इंडिया
प्रो. अनिल कुमार, प्राचार्य, पटना कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय, पटना
भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व आज पूरे देश में हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने और बहन की रक्षा का वचन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में निहित उस भावना का प्रतीक है, जिसमें एक-दूसरे की सुरक्षा, कल्याण और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यदि हम इस पर्व की ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि पर दृष्टि डालें तो रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा अत्यंत प्राचीन दिखाई देती है।

वैदिक काल से ही रक्षा सूत्र अथवा कलावा-मौली बांधने की परंपरा रही है। यज्ञ, युद्ध, मांगलिक कार्य अथवा किसी महत्वपूर्ण संकल्प के अवसर पर पुरोहित द्वारा यजमान की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता था। इसका उद्देश्य मंगलकामना, सुरक्षा और संकल्प की भावना को मजबूत करना था। आज भी धार्मिक अनुष्ठानों में यह परंपरा उसी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।
पौराणिक कथाओं में भी रक्षा सूत्र का विशेष महत्व मिलता है। मान्यता है कि जब देवराज इंद्र असुरों से घिर गए थे, तब गुरु बृहस्पति की सलाह पर इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। इसके बाद इंद्र को विजय प्राप्त हुई। भविष्य पुराण में राजा बलि से संबंधित कथा में रक्षा सूत्र बांधने और रक्षा मंत्र के उल्लेख का प्रसंग मिलता है। आज भी पुरोहितों द्वारा रक्षा सूत्र बांधते समय “येन बद्धो बली राजा…” मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
महाभारत में भी भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी से जुड़ा प्रसंग रक्षा के इसी भाव को अभिव्यक्त करता है। मान्यता है कि द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की कलाई पर वस्त्र का टुकड़ा बांधा था और श्रीकृष्ण ने संकट के समय द्रौपदी की रक्षा की। संभवतः इसी प्रकार के प्रसंगों ने आगे चलकर भाई-बहन के बीच राखी बांधने की परंपरा को भावनात्मक आधार प्रदान किया। यह हमारी गौरवशाली संस्कृति में प्रेम, कर्तव्य और संरक्षण की भावना को दर्शाता है।
लेकिन क्या रक्षाबंधन का संदेश केवल मनुष्य तक सीमित रहना चाहिए? हमारा मानना है कि नहीं। भारतीय संस्कृति में प्रकृति को भी परिवार का अभिन्न हिस्सा माना गया है। पेड़-पौधों, नदियों, पर्वतों और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की हमारी परंपरा अत्यंत पुरानी है। पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा को भी इसी व्यापक पर्यावरणीय दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। हमारे पूर्वज प्रकृति के संरक्षण को जीवन का अनिवार्य हिस्सा मानते थे।
आज मानव विकास की दौड़ में प्रकृति के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहा है। जंगलों की कटाई, पेड़ों का अनियंत्रित दोहन, जल स्रोतों का प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरणीय संकट को बढ़ा रहा है। हमें यह समझना होगा कि जब हम पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाते हैं, तब वास्तव में अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी चलाते हैं। पेड़ हमारे जीवन के आधार हैं। वे हमें ऑक्सीजन देते हैं, तापमान नियंत्रित करते हैं, मिट्टी का संरक्षण करते हैं और जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। इन समस्याओं के पीछे मानवजनित गतिविधियों की बड़ी भूमिका है। प्रकृति हमें लगातार संकेत दे रही है कि उसके संसाधनों का अंधाधुंध दोहन अब भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
इस रक्षाबंधन पर हमें अपनी परंपरा को एक नए और व्यापक अर्थ से जोड़ने की आवश्यकता है। पीपल, बरगद, पाकड़ और नीम जैसे महत्वपूर्ण वृक्षों के चारों ओर रक्षा सूत्र बांधते हुए हम यह संकल्प लें कि प्रकृति की रक्षा करेंगे, प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग करेंगे और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचेंगे।
देश की सभी माताओं, बहनों और छात्राओं से हमारी अपील है कि राखी बांधने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी अपने संकल्प का हिस्सा बनाएं। केवल पेड़ की पूजा या उसके चारों ओर धागा बांधना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी रक्षा, देखभाल और संवर्धन भी हमारी जिम्मेदारी होनी चाहिए।
आज का संकल्प
“बहनों द्वारा एक पेड़ प्रकृति के नाम।”
“हरित भविष्य के लिए एक पेड़ लगाकर विकसित भारत @ 2047 के सपने को साकार करें और राष्ट्रभक्ति की मिसाल पेश करें।”
आइए, इस रक्षाबंधन पर हम केवल भाई-बहन के रिश्ते की रक्षा का संकल्प न लें, बल्कि धरती माता, पेड़-पौधों, जल, वायु और समस्त जीव-जगत की रक्षा का भी संकल्प लें। यही हमारी संस्कृति के प्रति सच्चा सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
समस्त देशवासियों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई एवं ढेरों शुभकामनाएं।







