खाना बनाने की बिजली बंद होने से छात्राओं ने किया विरोध, पुलिस ने पहुंचकर कराया शांत — सुरक्षा के साथ भोजन की
वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
राकेश कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। पावापुरी स्थित बीएमआईएमएस गर्ल्स हॉस्टल में बुधवार को खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली की आपूर्ति बंद किए जाने के बाद छात्राओं का आक्रोश फूट पड़ा। बड़ी संख्या में छात्राएं हॉस्टल परिसर में एकजुट हो गईं और अपनी समस्याओं को लेकर विरोध जताने लगीं। छात्राओं ने हॉस्टल के मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
छात्राओं का कहना था कि हॉस्टल के मेस में उपलब्ध भोजन उनकी जरूरत और पसंद के अनुरूप नहीं है। भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी छात्राओं के बीच असंतोष की स्थिति रही है। ऐसी परिस्थिति में उन्हें अपनी पसंद के अनुसार भोजन तैयार करने के लिए जो सीमित विकल्प मिल रहा था, उसे भी बिजली आपूर्ति बंद कर समाप्त कर दिया गया। इससे छात्राओं की परेशानी और बढ़ गई।
सुरक्षा कारणों से बंद की गई बिजली
बताया गया कि कॉलेज प्रशासन के निर्देश पर हॉस्टल में खाना बनाने वाले स्थानों की बिजली आपूर्ति सुरक्षा कारणों से बंद कराई गई है। प्रशासन की ओर से बताया गया कि इन स्थानों पर अधिक क्षमता वाले विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे विद्युत लाइन पर अत्यधिक लोड पड़ने के साथ शॉर्ट सर्किट और आग लगने जैसी दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी।
इसी संभावित खतरे को देखते हुए खाना बनाने वाले स्थानों की बिजली बंद करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, बिजली बंद किए जाने के बाद छात्राओं के सामने भोजन तैयार करने को लेकर व्यावहारिक समस्या उत्पन्न हो गई।

हॉस्टल में जुटीं छात्राएं
बिजली बंद होने की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में छात्राएं एकत्रित हो गईं। छात्राओं ने अपनी नाराजगी जताते हुए भोजन की व्यवस्था में सुधार करने और खाना बनाने के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की। छात्राओं का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके साथ उनके भोजन की समस्या का भी समाधान किया जाना चाहिए।
विरोध की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें समझाकर शांत कराया। इसके बाद छात्राओं ने अपनी मांगों और समस्याओं को कॉलेज के प्राचार्य के समक्ष रखने की बात कही।
भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल
विरोध कर रही छात्राओं ने मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि हॉस्टल में उन्हें बेहतर और संतोषजनक भोजन उपलब्ध कराया जाए तो स्वयं खाना बनाने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो सकती है। छात्राओं ने मेस की व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने तथा भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की मांग की।
छात्राओं का यह भी कहना था कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं के लिए भोजन रोजमर्रा की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल है। इसलिए सुरक्षा के नाम पर खाना बनाने की सुविधा बंद करने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।
सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन जरूरी
पूरे मामले ने कॉलेज प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ बिजली के अत्यधिक लोड से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को सुरक्षित, पौष्टिक और संतोषजनक भोजन उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ऐसे में अब जरूरत इस बात की है कि विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए खाना बनाने के लिए सुरक्षित स्थान या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाए। साथ ही मेस में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी हो, ताकि छात्राओं की शिकायतों का स्थायी समाधान किया जा सके।
फिलहाल पुलिस के हस्तक्षेप के बाद छात्राओं का विरोध शांत हो गया है। अब सभी की नजर कॉलेज प्रशासन की ओर है कि छात्राओं की भोजन संबंधी शिकायतों और बिजली की समस्या का किस तरह स्थायी एवं सुरक्षित समाधान निकाला जाता है।







