बच्चों संग जमीन पर बैठकर खाया मध्याह्न भोजन, एसडीएम राजीव रंजन सिन्हा की सादगी ने जीता दिल

Written by Sanjay Kumar

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अजीत कुमार
जहानाबाद (अपना नालंदा)। प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान अक्सर सरकारी बैठकों, वातानुकूलित कार्यालयों और सरकारी वाहनों तक सीमित मानी जाती है। लेकिन जहानाबाद के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) राजीव रंजन सिन्हा ने अपनी सादगी और संवेदनशील कार्यशैली से इस धारणा को बदलने का प्रयास किया। मंगलवार को मखदुमपुर प्रखंड के सुगांव विद्यालय में उनके औचक निरीक्षण के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया।
एसडीएम विद्यालय पहुंचे तो उस समय बच्चे मध्याह्न भोजन (एमडीएम) कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बच्चों से बातचीत की और भोजन की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने किसी विशेष व्यवस्था की प्रतीक्षा नहीं की, बल्कि बच्चों के बीच जमीन पर बैठ गए और उन्हीं के साथ मध्याह्न भोजन किया। एसडीएम का यह सहज और सादगीपूर्ण व्यवहार विद्यालय परिसर में मौजूद शिक्षकों, छात्रों और ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक बन गया।


निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, कक्षाओं की स्थिति और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिया कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। साथ ही मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया।
राजीव रंजन सिन्हा ने बच्चों से पढ़ाई, उनकी समस्याओं और भविष्य की योजनाओं पर भी बातचीत की तथा उन्हें नियमित रूप से विद्यालय आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे को बेहतर शिक्षा और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।
एसडीएम की इस सादगी और बच्चों के प्रति आत्मीयता की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर भोजन करते देखना दुर्लभ दृश्य है। लोगों ने इसे एक सकारात्मक संदेश बताते हुए कहा कि ऐसे अधिकारी समाज में विश्वास और अपनापन बढ़ाते हैं।
विद्यालय के शिक्षक और स्थानीय लोगों ने भी एसडीएम के इस व्यवहार की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह कदम न केवल बच्चों का उत्साह बढ़ाने वाला है, बल्कि सरकारी विद्यालयों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने वाला भी है। उनके इस सादगीपूर्ण कार्य की तस्वीरें और चर्चाएं अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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