सृष्टि के रचयिता ने इस संसार का निर्माण निश्चित रूप से किसी वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित प्रक्रिया के तहत किया होगा। प्रकृति में मौजूद हर जीव-जंतु, पेड़-पौधे, जल, वायु, मिट्टी और पर्वत का अपना महत्व है। यही सभी मिलकर पृथ्वी पर जीवन के संतुलन को बनाए रखते हैं। इसलिए प्रकृति के किसी एक महत्वपूर्ण घटक के साथ छेड़छाड़ का सीधा प्रभाव पूरे पर्यावरण पर पड़ता है।
जब हम अच्छी तरह जानते हैं कि पेड़-पौधों के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना संभव नहीं है, तो फिर इनके संरक्षण के बजाय अंधाधुंध कटाई क्यों की जा रही है? विकास के नाम पर लगातार पेड़ों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने पर्यावरण के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। सवाल यह है कि क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, निर्मल जल और सुरक्षित पर्यावरण देना चाहते हैं?

ये सवाल लगातार मन को विचलित करते हैं। आज वैश्विक तापमान में वृद्धि, ग्लेशियरों का पिघलना, मौसम में असामान्य बदलाव, अनियमित वर्षा, अत्यधिक गर्मी और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं हमें सचेत कर रही हैं। मानव गतिविधियों और प्रकृति के बीच बिगड़ता संतुलन जलवायु परिवर्तन के संकट को और गंभीर बना रहा है।
अब समय आ गया है कि हम पर्यावरण संरक्षण को केवल चर्चा का विषय न बनाकर अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। अधिक से अधिक पौधे लगाना, पेड़ों की अनावश्यक कटाई रोकना, जल संरक्षण करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अभियान में युवा पीढ़ी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। युवाओं को पर्यावरण संरक्षण की मुख्यधारा से जोड़कर समाज में व्यापक जागरूकता पैदा की जा सकती है। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का वातावरण तैयार कर सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान केवल सरकारों के प्रयास से संभव नहीं है। इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सकारात्मक भागीदारी जरूरी है। यदि आज हम प्रकृति की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाते हैं, तभी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य दे पाएंगे।
पोस्टर सौजन्य: प्रो. अनिल कुमार सिंह, समन्वयक, वनस्पति शास्त्र विभाग, नालंदा खुला विश्वविद्यालय, नालंदा, बिहार, इंडिया।
कमेंट के साथ प्रस्तुति: प्रो. श्याम नंदन प्रसाद, पूर्व प्राचार्य एवं पर्यावरणविद्, मुख्य समन्वयक, वनस्पति शास्त्र विभाग, नालंदा खुला विश्वविद्यालय, नालंदा, बिहार, इंडिया।







