बिहार में ‘आर्केस्ट्रा’ की आड़ में मानव तस्करी का बड़ा खुलासा, 7 नेपाली लड़कियों समेत 21 नाबालिग बच्चियां मुक्त

Written by Sanjay Kumar

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जेपी चौधरी
पटना (अपना नालंदा)। बिहार में आर्केस्ट्रा समूहों की आड़ में चल रहे नाबालिग बच्चियों के शोषण और मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। सारण जिले में रातभर चले संयुक्त अभियान के दौरान 13 आर्केस्ट्रा समूहों से 7 नेपाली लड़कियों समेत कुल 21 नाबालिग बच्चियों को मुक्त कराया गया। इस कार्रवाई में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
यह रेस्क्यू अभियान एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन (एवीए) की सूचना पर सारण के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार के नेतृत्व में चलाया गया। अभियान में सारण पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू), कई थानों की पुलिस टीमों के साथ नारायणी सेवा संस्थान और एवीए के सदस्य शामिल रहे। दोनों संगठन बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले देश के बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन से जुड़े हुए हैं।
नेपाल से बिहार तक फैला था तस्करी का नेटवर्क
मुक्त कराई गई बच्चियों की उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है। जांच में सामने आया कि इन बच्चियों को नेपाल, असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से बहला-फुसलाकर बिहार लाया गया था।
प्रारंभिक काउंसलिंग के दौरान कई बच्चियों ने बताया कि उन्हें अच्छी नौकरी, आकर्षक कमाई और बेहतर जिंदगी का सपना दिखाकर इस जाल में फंसाया गया। बाद में उन्हें आर्केस्ट्रा समूहों में भेज दिया गया, जहां शादियों और अन्य आयोजनों में घंटों तक अश्लील भोजपुरी गीतों पर नृत्य करने के लिए मजबूर किया जाता था।
बच्चियों ने यह भी बताया कि कार्यक्रमों के दौरान कई बार दर्शकों द्वारा उनके साथ छेड़खानी, अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया जाता था। विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी जाती थीं और प्रताड़ित किया जाता था।
अनाथ बच्ची की दर्दनाक कहानी ने झकझोर दिया
रेस्क्यू की गई झारखंड की एक अनाथ बच्ची ने काउंसलिंग के दौरान अपनी दर्दनाक आपबीती सुनाई। बच्ची ने बताया कि लगभग 15 वर्ष की उम्र में एक व्यक्ति ने बेहतर जीवन का सपना दिखाकर उससे शादी कर ली। कुछ समय बाद वह उसे छोड़कर चला गया।
इसके बाद उसी व्यक्ति ने उसकी मुलाकात एक महिला से कराई, जिसने नौकरी और “अच्छे भविष्य” का लालच देकर उसे अपने साथ ले लिया। बाद में उस महिला ने बच्ची को “गोलू” नामक व्यक्ति के हाथों बेच दिया। पुलिस ने अभियान के दौरान आरोपी गोलू को गिरफ्तार कर लिया।
काउंसलिंग के दौरान बच्ची फूट-फूटकर रो पड़ी। उसने कहा कि पिछले तीन वर्षों से वह डर और निराशा के बीच जी रही थी और उसे कभी उम्मीद नहीं थी कि वह इस जाल से बाहर निकल पाएगी।
एक महीने तक चली गुप्त जांच
एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन की टीम ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए करीब एक महीने तक गुप्त रूप से जांच की। टीम के सदस्य ग्राहक बनकर विभिन्न आर्केस्ट्रा समूहों में पहुंचे और वहां नाबालिग बच्चियों की मौजूदगी की पुष्टि की।

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