“बरगद के नीचे गूंजे मंगल गीत, सुहागिनों ने वट सावित्री व्रत रख पति की लंबी उम्र की मांगी दुआ”

Written by Sanjay Kumar

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मोहम्मद जियाउद्दीन

इस्लामपुर (अपना नालंदा)। ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को इस्लामपुर प्रखंड समेत खोदागंज थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों में वट सावित्री पूजा श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाई गई। सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर बरगद के पेड़ की पूजा की और अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि तथा अखंड सौभाग्य की कामना की।

इस अवसर पर पनहर, बौरी सराय, कोचरा, मदारगंज, सेरथुआ सराय सहित कई गांवों में सुबह से ही धार्मिक माहौल देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार में सजी-धजी नजर आईं। गांवों के बरगद वृक्ष के पास बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित हुईं, जहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई।

महिलाओं ने बरगद के वृक्ष की परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत बांधा और जल अर्पित किया। पूजा के दौरान रोली, चावल, फल, फूल, धूप-दीप एवं अन्य पूजन सामग्री से वट वृक्ष की आराधना की गई। इसके बाद महिलाओं ने सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण किया और परिवार की सुख-शांति की कामना की।

पूजा स्थलों पर कई जगह मंगल गीत और पारंपरिक लोकगीत भी गूंजते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे को वट सावित्री पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन माता सावित्री ने अपने तप, भक्ति और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

गौतम पाण्डेय उर्फ बंटी बाबा ने बताया कि सनातन धर्म में वट सावित्री पूजा का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि यह पर्व नारी शक्ति, समर्पण और अटूट वैवाहिक विश्वास का प्रतीक है। महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से यह व्रत रखती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

पूरे क्षेत्र में वट सावित्री पूजा को लेकर उत्साह का माहौल बना रहा। मंदिरों और पूजा स्थलों पर सुबह से महिलाओं की भीड़ लगी रही तथा दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा।

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