एआई में ही भविष्य के रोजगार की नई राह, छात्रों को तकनीकी कौशल से लैस होना जरूरी : प्राचार्या सुनीता सिन्हा

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। बदलती तकनीकी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका को देखते हुए नालंदा कॉलेज में बुधवार को एआई विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कॉलेज सभागार में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को एआई की नई संभावनाओं, इसके व्यावहारिक उपयोग, तकनीकी विकास तथा भविष्य में रोजगार के बदलते स्वरूप से परिचित कराना था।

कार्यशाला का आयोजन वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी सेल्सफोर्स एवं नालंदा कॉलेज के कंप्यूटर विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और विशेषज्ञों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी हासिल की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नालंदा कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर (डॉ.) सुनीता सिन्हा ने कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों का है। शिक्षा, उद्योग, स्वास्थ्य, वित्त, कृषि और रोजगार सहित जीवन के लगभग हर क्षेत्र में एआई की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में छात्रों को समय के साथ नई तकनीकों को सीखने और अपने कौशल को विकसित करने के लिए तैयार रहना होगा।

उन्होंने छात्रों से नई तकनीक सीखने के साथ-साथ नवाचार के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रहना वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि वे बदलते रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।

प्रो. सिन्हा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर विद्यार्थियों में जिज्ञासा और सीखने की इच्छा होना सकारात्मक संकेत है। यदि युवा तकनीक का रचनात्मक और जिम्मेदार उपयोग सीख लें तो वे न केवल रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकते हैं, बल्कि नए विचारों और नवाचार के माध्यम से समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

एआई की मूल अवधारणाओं से कराया परिचित

कार्यशाला का संचालन एमसीए समन्वयक डॉ. शशांक शेखर झा एवं बीसीए समन्वयक डॉ. सरफुद्दीन गाजी के निर्देशन में किया गया। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को एआई की मूल अवधारणाओं से लेकर उसके व्यावहारिक उपयोग तक की जानकारी दी।

विशेषज्ञ वक्ता किरण मान्याला ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल अवधारणाओं, इसकी कार्यप्रणाली, व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई अब केवल कंप्यूटर और तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है। स्वास्थ्य सेवाओं में रोगों की पहचान, शिक्षा में व्यक्तिगत सीखने की व्यवस्था, वित्तीय क्षेत्र में विश्लेषण, कृषि में फसल और मौसम संबंधी जानकारी तथा प्रशासन में डाटा आधारित निर्णय लेने जैसे अनेक क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि आने वाले समय में एआई का प्रभाव रोजगार के पारंपरिक स्वरूप पर भी पड़ेगा। कुछ कार्यों में स्वचालन बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर एआई से जुड़े नए क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा होंगे। ऐसे में छात्रों को तकनीक से डरने के बजाय उसे समझने और अपने कौशल के साथ जोड़ने की जरूरत है।

उद्योग जगत की जरूरतों की दी जानकारी

कार्यक्रम में एक्सेंचर कंपनी के टेक्निकल विशेषज्ञ अमन तिवारी ने एआई आधारित तकनीकों और उद्योग जगत में उनके उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज विभिन्न कंपनियां डाटा, ऑटोमेशन और एआई आधारित टूल्स का इस्तेमाल अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए कर रही हैं।

उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल एआई के बारे में सैद्धांतिक जानकारी हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि प्रोग्रामिंग, डेटा विश्लेषण, समस्या समाधान और एआई आधारित एप्लीकेशन के निर्माण जैसे व्यावहारिक कौशल भी विकसित करें। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहा है और जो विद्यार्थी सीखने की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखेंगे, उनके लिए भविष्य में अवसरों की कमी नहीं होगी।

अमन तिवारी ने छात्रों को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के बारे में बताते हुए कहा कि आने वाले समय में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ रचनात्मक सोच, टीमवर्क और समस्या समाधान की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी। इसलिए विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही इन कौशलों को विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

छात्रों ने विशेषज्ञों से पूछे सवाल

कार्यशाला के दौरान छात्र-छात्राओं में एआई को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने एआई, मशीन लर्निंग, रोजगार के अवसर, करियर विकल्प, तकनीकी कौशल तथा उद्योगों की बदलती जरूरतों से संबंधित कई सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के सवालों का विस्तार से जवाब दिया और उन्हें एआई के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक तैयारी के बारे में जानकारी दी। सवाल-जवाब के इस सत्र ने छात्रों को एआई के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर दिया।

विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी कि वे नियमित रूप से नई तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल करें, ऑनलाइन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण का लाभ उठाएं तथा छोटे-छोटे प्रोजेक्ट के माध्यम से अपने तकनीकी ज्ञान को मजबूत करें।

उद्योग और शिक्षा के बीच सेतु बनेगी ऐसी कार्यशालाएं

कार्यशाला में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा संस्थानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को कक्षा की पढ़ाई के साथ वास्तविक उद्योग जगत में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों और कौशल की जानकारी मिलती है।

इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को यह समझने में भी मदद करते हैं कि कंपनियां भविष्य में किस तरह के तकनीकी कौशल वाले युवाओं को प्राथमिकता दे सकती हैं। इससे छात्र अपने करियर की तैयारी सही दिशा में कर सकते हैं।

कार्यक्रम में कंप्यूटर विभाग के मो. अलाउद्दीन, परमानंद प्रसाद, मो. आफताब आलम, जितेंद्र कुमार सिन्हा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष ने कार्यशाला में शामिल विशेषज्ञों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को नई तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें उद्योग जगत की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में अत्यंत उपयोगी साबित होंगी।

कार्यशाला ने नालंदा कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर नई समझ और उत्सुकता पैदा की। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि भविष्य की तकनीक को समझना और उसके अनुरूप खुद को तैयार करना ही युवाओं के लिए बेहतर करियर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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