सीकरिया स्थित फैक्ट्री में हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
अजीत कुमार
जहानाबाद (अपना नालंदा)। जहानाबाद जिले के सीकरिया स्थित एक लोहे की अलमारी बनाने वाली फैक्ट्री में करंट लगने से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान छोटकी कल्पा निवासी अरविंद कुमार के रूप में की गई है। घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
बताया जाता है कि संबंधित फैक्ट्री में तैयार की जाने वाली लोहे की अलमारियां बाजार में “सबेरा” नाम से बेची जाती हैं। घटना के संबंध में फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि अरविंद कुमार की नियुक्ति जनरेटर ऑपरेटर और लाइन मेंटेनेंस के कार्य के लिए की गई थी। प्रबंधन के अनुसार घटना वाले दिन फैक्ट्री में मजदूरों की संख्या कम थी, जिसके कारण अरविंद कुमार अन्य कार्यों में भी सहयोग कर रहे थे। इसी दौरान स्विच ऑफ करने के समय वे 11 हजार वोल्ट प्रवाहित बिजली लाइन की चपेट में आ गए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद फैक्ट्री परिसर और आसपास के इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया जाता था। लोगों का कहना है कि यदि आवश्यक सुरक्षा उपकरण और सावधानियां मौजूद होतीं तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था और एक मजदूर की जान बच जाती।
मृतक के परिजनों ने भी फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता नहीं बरती जाती थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मजदूरों को ईपीएफ, बीमा और अन्य श्रमिक सुविधाएं नियमित रूप से दी जा रही थीं या नहीं। परिजनों ने प्रशासन से पूरे मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
फैक्ट्री प्रबंधन ने कहा है कि वे मृतक के परिवार को मुआवजा देने के लिए तैयार हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल मुआवजा देकर मामले को समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि मजदूर की जान की कीमत केवल आर्थिक सहायता नहीं हो सकती, बल्कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। अब यह जांच का विषय है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया जा रहा था और मजदूरों को श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं या नहीं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर मृतक परिवार को न्याय दिलाया जाए। लोगों ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार गंभीर हादसों का कारण बन रही है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोक सकती है।







