बारिश का इंतजार, फिर भी नहीं रुकी खेती: हरनौत में नलकूपों के सहारे धान रोपाई शुरू, 12,193 हेक्टेयर का लक्ष्य

Written by Sanjay Kumar

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हरिओम कुमार
हरनौत (अपना नालंदा)। मानसून की रफ्तार धीमी होने के बावजूद नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड के किसान खेती-किसानी के काम में जुट गए हैं। बिरजू मिल्की, द्वारिका बिगहा, सरथा, कल्याण बिगहा समेत कई गांवों में किसानों ने नलकूपों और निजी पंपसेटों के सहारे खेतों में पानी भरकर धान की रोपाई शुरू कर दी है। किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही अच्छी बारिश होगी, जिससे धान की फसल को पर्याप्त पानी मिलेगा और बेहतर उत्पादन प्राप्त होगा।
कृषि विभाग के अनुसार हरनौत प्रखंड में इस वर्ष 12 हजार 193 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक करीब पांच प्रतिशत क्षेत्र में रोपाई का कार्य पूरा हो चुका है। खेतों में हलचल बढ़ने लगी है और जिन किसानों की नर्सरी तैयार हो चुकी है, वे रोपाई में तेजी ला रहे हैं।
बिरजू मिल्की के किसान मनोज कुमार और ब्रजेश सिंह तथा द्वारिका बिगहा के किसान अरुण सिंह ने बताया कि वे हर वर्ष 25 मई तक धान की नर्सरी तैयार कर लेते हैं और जून के अंतिम सप्ताह से रोपाई शुरू कर देते हैं। इस बार भी नर्सरी समय पर तैयार हो गई, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण उन्हें नलकूप और पंपसेट के सहारे खेतों में पानी भरना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि यदि अभी रोपाई पूरी हो जाएगी तो बारिश शुरू होते ही पौधों की बढ़वार तेज होगी और अच्छी पैदावार मिलने की संभावना रहेगी।
हालांकि कृत्रिम सिंचाई के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों ने बताया कि धान रोपाई के लिए मजदूर 500 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी मांग रहे हैं। वहीं एक बीघा खेत की रोपाई का ठेका करीब 1,200 रुपये में दिया जा रहा है। खेत की जुताई के लिए ट्रैक्टर या पावर टिलर मालिक भी लगभग 1,200 रुपये प्रति बीघा वसूल रहे हैं। बढ़ती लागत के बावजूद किसान बेहतर उत्पादन की उम्मीद में खेती जारी रखे हुए हैं।
किसानों का अनुमान है कि मौसम अनुकूल रहने पर एक बीघा खेत से लगभग 30 मन धान का उत्पादन हो सकता है। यदि समय पर अच्छी वर्षा हो गई तो किसानों की मेहनत रंग लाएगी और उत्पादन भी बेहतर होगा।

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