राजगीर मलमास मेला में व्यापारियों का दर्द, उपेंद्र विभूति बोले- अब भी संभल जाए प्रशासन

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। जनसुराज के व्यवसायिक प्रकोष्ठ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कुमार विभूति ने अपना नालंदा से विशेष बातचीत में राजगीर के ऐतिहासिक राजकीय मलमास मेला की व्यवस्थाओं, व्यापारिक गतिविधियों और मेले में आ रही चुनौतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा, विधि-व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर सराहनीय कार्य किए गए हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण कमियों के कारण मेला से जुड़े व्यापारी, मेला ठेकेदार और मनोरंजन व्यवसाय से जुड़े लोग आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
उपेंद्र कुमार विभूति ने कहा कि इस बार मेले में सर्कस संचालक, थिएटर संचालक, विभिन्न झूलों के संचालक, दुकान लगाने वाले व्यापारी तथा अन्य व्यावसायिक वर्गों के चेहरे पर मायूसी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि अधिकांश व्यवसायियों को लाभ होने की उम्मीद तो दूर, अपनी मूल पूंजी तक डूबने की चिंता सता रही है। इससे मेले से जुड़े व्यापारिक वर्ग में असंतोष का माहौल है।

उन्होंने कहा कि राजगीर का राजकीय मलमास मेला धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक माह तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पूजा-अर्चना, कुंड स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए पहुंचते हैं। सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रहती है। हालांकि, मेले में आने वाले लोगों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो परिवार के साथ मेला घूमने, झूला झूलने, सर्कस और थिएटर देखने तथा खरीदारी करने के उद्देश्य से आता है।

विभूति ने कहा कि यही वर्ग मेले के व्यापारिक पक्ष को मजबूत करता है, लेकिन इस बार यातायात और पार्किंग व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में लोग राजगीर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नवादा, गया और आसपास के जिलों से आने वाले लोगों के वाहनों को बनगंगा के पास ही रोक दिया जाता है, जबकि वहां से मेला क्षेत्र की दूरी लगभग चार से पांच किलोमीटर है। इसी प्रकार गिरियक मोड़, रेलवे क्रॉसिंग मोड़ और छबीलापुर की ओर से आने वाले वाहनों को भी पहले ही रोक दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग अपने वाहन छोड़कर मेला क्षेत्र तक जाने में असुविधा महसूस करते हैं। कई लोग परिवार के साथ आने के बावजूद बीच रास्ते से ही वापस लौट जाते हैं। इसका सीधा असर मेले में लगे दुकानदारों, झूला संचालकों, थिएटर और सर्कस व्यवसायियों की आय पर पड़ रहा है।

"How long will the economy survive on litchis and makhanas? Small businesses are demanding answers from the Bihar government." "Tourism has increased, but employment hasn't! Jansuraj poses significant questions to the government."

उपेंद्र कुमार विभूति ने जिला प्रशासन से मांग की कि मेले की अवधि अभी लगभग एक सप्ताह शेष है। ऐसे में पार्किंग और आवागमन की व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग मेले तक पहुंच सकें और व्यापारियों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में कोई भी मेला का ठेका लेने, झूले लगाने, सर्कस या थिएटर संचालित करने अथवा व्यापार करने के लिए आगे नहीं आएगा। इससे आने वाले वर्षों में राजगीर मलमास मेला का व्यापारिक आकर्षण प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ-साथ व्यापारिक वर्ग की समस्याओं पर भी गंभीरता से विचार करेगा, ताकि इस ऐतिहासिक मेले की धार्मिक और आर्थिक दोनों महत्ता बनी रहे।

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