हरिओम कुमार
हरनौत (अपना नालंदा)। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली प्रमुख योजना मनरेगा अब नए स्वरूप में दिखाई दे सकती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर “जी रामजी” अर्थात विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) को लागू करने की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत इसे 1 जुलाई 2026 से लागू किए जाने की बात कही जा रही है।
वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (नरेगा) के रूप में शुरू हुई यह योजना वर्ष 2010 में मनरेगा के नाम से जानी जाने लगी थी। नई व्यवस्था को वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से लागू किया जाना था, लेकिन तकनीकी और पोर्टल संबंधी तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण इसकी शुरुआत आगे बढ़ा दी गई। अब इसे जुलाई से लागू करने की तैयारी चल रही है।
कार्यक्रम से जुड़े लेखापाल मो. शहनाज़ अनवर ने बताया कि वर्तमान में संचालित सभी कार्य नई योजना के अंतर्गत शामिल कर लिए जाएंगे। पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते।
नई व्यवस्था में केवल मजदूरी आधारित कार्यों के बजाय स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा। जल संरक्षण, ग्रामीण सड़क, पुलिया, सिंचाई, स्कूल भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, बाढ़ सुरक्षा तथा आजीविका से जुड़े विकास कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी। स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए वर्किंग शेड निर्माण की भी व्यवस्था प्रस्तावित है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव रोजगार अवधि में किया गया है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों के बजाय 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने तथा मजदूरी का भुगतान डीबीटी के माध्यम से शीघ्र करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
एक जुलाई से नए स्वरूप में लागू होगी जी रामजी योजना
Written by Sanjay Kumar
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