कक्षा से कलेक्ट्रेट तक पहुंचीं छात्राएं, डीएम उदिता सिंह ने प्रशासनिक कामकाज का कराया प्रत्यक्ष अनुभव

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना को सिर्फ जागरूकता अभियान तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यवहारिक अनुभव और नेतृत्व विकास से जोड़ने की दिशा में नालंदा जिला प्रशासन ने अनूठी पहल की है। इसी कड़ी में जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने अपने कार्यालय कक्ष में कन्या मध्य विद्यालय, छोटी पहाड़ी की छात्राओं के साथ सीधा और प्रेरक संवाद किया। इस दौरान छात्राओं को न केवल शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया, बल्कि उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था, साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति, स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक भी किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को प्रशासनिक कार्यप्रणाली से परिचित कराने के साथ उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना था। संवाद के दौरान छात्राओं ने अपनी पहचान और भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के बारे में बताया। जिला पदाधिकारी ने उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने तथा जीवन में स्पष्ट और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रेरित किया।

बेटियों को ऊंचा लक्ष्य रखने की दी सीख

डीएम ने छात्राओं से कहा कि शिक्षा बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने छात्राओं को अपनी क्षमता पहचानने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की आदत के जरिए कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

संवाद के दौरान छात्राओं के साथ कई महत्वपूर्ण सामाजिक और समसामयिक विषयों पर भी चर्चा की गई। उन्हें साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के बारे में जागरूक किया गया। छात्राओं को संदिग्ध लिंक, अनजान कॉल और ऑनलाइन ठगी के तरीकों से सावधान रहने तथा अपनी निजी एवं बैंकिंग जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सीख दी गई।

नशे और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश

छात्राओं को नशे के दुष्परिणामों की जानकारी देते हुए नशे से दूर रहने और अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा शोषण, बालिकाओं के अधिकार और सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज उठाने के तरीके भी बताए गए।

अधिकारियों ने छात्राओं को समझाया कि किसी भी तरह की परेशानी, शोषण या असुरक्षित स्थिति का सामना होने पर चुप रहने के बजाय भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक या संबंधित प्रशासनिक एवं कानूनी तंत्र से सहायता लेनी चाहिए।

छात्राओं को कराया गया प्रशासनिक कार्यालयों का एक्सपोजर विजिट

जिला पदाधिकारी ने छात्राओं को केवल कागजी तौर पर प्रशासनिक व्यवस्था समझाने के बजाय उसका प्रत्यक्ष अनुभव कराने के उद्देश्य से विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यालयों का एक्सपोजर विजिट कराने का निर्देश दिया। इसके बाद छात्राओं ने जिला प्रोग्राम कार्यालय (आईसीडीएस), इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) तथा जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय का भ्रमण किया।

इस भ्रमण के दौरान छात्राओं को बताया गया कि जिला प्रशासन किस प्रकार अलग-अलग माध्यमों से नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने, शहर की निगरानी करने, शिकायतों का समाधान करने और स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं को धरातल पर लागू करने का काम करता है।

ICCC में जानी शहर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था

एक्सपोजर विजिट के दौरान छात्राओं ने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का भ्रमण किया। यहां उन्हें शहर की अत्याधुनिक सुरक्षा एवं डिजिटल निगरानी व्यवस्था की जानकारी दी गई।

छात्राओं को बताया गया कि शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए 491 कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाती है। इसके अलावा 15 प्रमुख क्षेत्रों में पब्लिक एड्रेस सिस्टम की व्यवस्था है, जिसके माध्यम से जरूरत पड़ने पर आपातकालीन घोषणाएं की जा सकती हैं।

छात्राओं को 10 स्थानों पर लगाए गए इमरजेंसी कॉल बॉक्स के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि आपात स्थिति में व्यक्ति एक बटन दबाकर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकता है। इस दौरान छात्राओं ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से शहर की सुरक्षा व्यवस्था को करीब से समझा।

लोक शिकायत निवारण कार्यालय में जाना शिकायत समाधान का तरीका

इसके बाद छात्राओं ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय का भ्रमण किया। यहां उन्हें बताया गया कि यह आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण और पारदर्शी मंच है।

छात्राओं को सरल तरीके से समझाया गया कि यदि किसी नागरिक को बिजली, पानी, सड़क, छात्रवृत्ति अथवा अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ स्थानीय स्तर पर नहीं मिल रहा है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत यहां आवेदन कर सकता है। संबंधित मामले की सुनवाई के बाद नियमानुसार 60 कार्य दिवसों के भीतर न्यायसंगत समाधान उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बारे में भी छात्राओं को जानकारी दी गई।

इस दौरान छात्राओं ने शिकायत दर्ज कराने, उसकी सुनवाई और समाधान की प्रशासनिक प्रक्रिया को समझा।

पोषण और स्वच्छता को लेकर भी मिली महत्वपूर्ण जानकारी

जिला प्रोग्राम कार्यालय (आईसीडीएस) के भ्रमण के दौरान छात्राओं को वर्तमान में चल रहे राष्ट्रीय पोषण माह, जो 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, के बारे में जानकारी दी गई।

छात्राओं को किशोरावस्था में संतुलित और पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस उम्र में शरीर और मस्तिष्क का तेजी से विकास होता है, इसलिए भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होना बेहद जरूरी है।

उन्हें आयरन युक्त खाद्य पदार्थ और आयोडीन युक्त नमक के सेवन की सलाह दी गई। साथ ही व्यक्तिगत स्वच्छता, साफ-सफाई और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए भी प्रेरित किया गया। छात्राओं को बताया गया कि बेहतर पोषण केवल शारीरिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक विकास और पढ़ाई में एकाग्रता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से जानने का मिला अवसर

पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद किया और विभिन्न विभागों के कामकाज को करीब से समझा। इस पहल से छात्राओं को यह जानने का अवसर मिला कि जिला स्तर पर प्रशासन किस प्रकार नागरिकों की समस्याओं के समाधान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भूमिका निभाता है।

जिला प्रशासन की इस पहल को छात्राओं के लिए व्यावहारिक शिक्षा, आत्मविश्वास निर्माण और नेतृत्व क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ये पदाधिकारी और शिक्षिका रहीं मौजूद

इस अवसर पर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) अर्चना कुमारी, जिला परियोजना प्रबंधक, जिला मिशन समन्वयक, मनो-सामाजिक परामर्शी, विद्यालय की शिक्षिका निक्की कुमारी सहित कन्या मध्य विद्यालय, छोटी पहाड़ी की छात्राएं उपस्थित रहीं।

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