संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा जिले में कार्यरत जीओबी (Government of Bihar) मद से वेतन पाने वाले नियोजित शिक्षकों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए जिले में जीओबी मद में पर्याप्त आवंटन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। वेतन भुगतान में हो रही देरी को लेकर शिक्षक संघ ने शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव से अविलंब आवंटन उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस संबंध में परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ, नालंदा के जिलाध्यक्ष रौशन कुमार ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि जिले में कार्यरत जीओबी मद से वेतन पाने वाले नियोजित शिक्षकों को जुलाई माह से वेतन नहीं मिला है। लगातार दो माह से वेतन लंबित रहने के कारण शिक्षकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।

मुख्य सचिव को सौंपा आवेदन
जिलाध्यक्ष रौशन कुमार ने बताया कि शुक्रवार को शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव राजीव रौशन को आवेदन देकर नालंदा जिले के लिए जीओबी मद में आवश्यक आवंटन उपलब्ध कराने की मांग की गई है। आवेदन के माध्यम से विभाग का ध्यान शिक्षकों की आर्थिक स्थिति और लंबित वेतन भुगतान की समस्या की ओर आकृष्ट कराया गया है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालयों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से उनके सामने घरेलू खर्च चलाने की समस्या उत्पन्न हो रही है। दो माह का वेतन लंबित होने से शिक्षकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
राशन से लेकर बच्चों की फीस तक प्रभावित
रौशन कुमार ने कहा कि वेतन नहीं मिलने का सीधा असर शिक्षकों के परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ रहा है। कई शिक्षक समय पर राशन, दवाइयां, बच्चों की स्कूल फीस और अन्य जरूरी घरेलू खर्च का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। अचानक सामने आने वाले पारिवारिक खर्चों को पूरा करने के लिए उन्हें उधार लेने या अन्य माध्यमों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज को शिक्षित करने और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनका वेतन समय पर नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है। सरकार और शिक्षा विभाग को इस समस्या का जल्द समाधान करना चाहिए।
बैंक लोन की ईएमआई चुकाना भी मुश्किल
शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ने कहा कि बड़ी संख्या में नियोजित शिक्षकों ने विभिन्न बैंकों से लोन ले रखा है। वेतन समय पर नहीं मिलने के कारण कई शिक्षकों के सामने लोन की मासिक किस्त (ईएमआई) चुकाने की समस्या खड़ी हो गई है। समय पर ईएमआई नहीं जमा होने से शिक्षकों का क्रेडिट रिकॉर्ड प्रभावित होने की आशंका है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि वेतन भुगतान में इसी तरह देरी होती रही तो शिक्षकों की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। भविष्य में बैंक से ऋण लेने में भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

अविलंब आवंटन भेजने की मांग
रौशन कुमार ने शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव से मांग की है कि नालंदा जिले में जीओबी मद के लिए अविलंब पर्याप्त राशि का आवंटन भेजा जाए, ताकि जुलाई और अगस्त माह सहित लंबित वेतन का भुगतान जल्द से जल्द किया जा सके।
उन्होंने कहा कि जिले में हजारों नियोजित शिक्षक वेतन भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शिक्षकों की आर्थिक कठिनाइयों को देखते हुए सरकार को इस मामले में तत्काल पहल करनी चाहिए। आवंटन उपलब्ध होने के बाद लंबित वेतन का भुगतान शीघ्र कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।
शिक्षकों में बढ़ रहा असंतोष
लगातार दो माह से वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षकों में भी असंतोष बढ़ रहा है। संघ ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने की आवश्यकता है। संघ का कहना है कि वेतन भुगतान में देरी का असर न केवल शिक्षकों की व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति पर पड़ता है, बल्कि उनके परिवार की आवश्यक जरूरतों पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ता है।
शिक्षक संघ ने उम्मीद जताई है कि मुख्य सचिव के स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए नालंदा जिले के लिए जल्द आवंटन उपलब्ध कराया जाएगा और लंबित वेतन का भुगतान कराया जाएगा।







