हरिओम कुमार
हरनौत (अपना नालंदा)। नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड में रविवार से राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया गया। हालांकि अभियान की शुरुआत के साथ ही आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर भी साफ दिखाई दिया। हड़ताल के कारण प्रखंड के 56 पोलियो केंद्रों पर अभियान बाधित रहा, जबकि केवल 40 केंद्रों पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जा सकी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को सफल बनाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए निर्धारित लक्ष्य पूरा करने का दावा किया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, हरनौत के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (एमओआईसी) डॉ. राजीव रंजन सिन्हा के निर्देशन में हरनौत बाजार स्थित नियामतपुर महादलित टोला से अभियान का शुभारंभ किया गया। इस दौरान पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की दो बूंद दवा पिलाकर अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई।
अभियान के उद्घाटन अवसर पर नोडल पदाधिकारी डॉ. अनिरुद्ध कुमार, स्वास्थ्य प्रबंधक कृष्ण कुमार मुरारी, बीएम एंड ई मनोज कुमार, डब्ल्यूएचओ के ब्लॉक मॉनिटर भोला कुमार, बीसीएम प्रमिला रॉय सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
एमओआईसी डॉ. राजीव रंजन सिन्हा ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान छह दिनों तक संचालित किया जाएगा। पहले चरण में बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई जा रही है, जबकि 29 जून से 6 जुलाई तक स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक देंगी जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने बताया कि प्रखंड में करीब 31,200 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 96 हाउस-टू-हाउस टीम, 11 ट्रांजिट टीम और 8 डिपो टीम गठित की गई हैं।
डॉ. सिन्हा ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने पांच वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को पोलियो की दवा अवश्य पिलवाएं, ताकि कोई भी बच्चा इस गंभीर बीमारी की चपेट में न आए।
हड़ताल के कारण प्रभावित हुआ अभियान
उधर, बीते 23 जून से प्रखंड की करीब 200 आशा कार्यकर्ता एवं आशा फैसिलिटेटर बकाया मानदेय और पारिश्रमिक भुगतान की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण उन्होंने रविवार से शुरू हुए पल्स पोलियो अभियान का भी बहिष्कार कर दिया।
प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे किसी भी स्वास्थ्य कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगी। उनका कहना है कि अभियान प्रभावित होने की जिम्मेदारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने दी सफाई
इधर, स्वास्थ्य प्रबंधक कृष्ण कुमार मुरारी ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं का मार्च माह तक का मानदेय भुगतान किया जा चुका है। मार्च के बाद राज्य स्तर पर अश्विन पोर्टल नहीं खुलने के कारण भुगतान लंबित है। उन्होंने बताया कि नालंदा जिले के हरनौत, रहुई और एक अन्य प्रखंड में ही कार्य प्रभावित हुआ है। उनका दावा है कि अधिकांश आशा कार्यकर्ता काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन आशा फैसिलिटेटरों द्वारा उन्हें गुमराह किया जा रहा है, जिसके कारण वे पल्स पोलियो अभियान में शामिल नहीं हो रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि हड़ताल के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए अभियान को सफल बनाने का प्रयास जारी रहेगा, ताकि प्रखंड का कोई भी बच्चा पोलियो की जीवनरक्षक खुराक से वंचित न रह जाए।







