बिहारशरीफ नगर निगम में सियासी संग्राम! दो खेमों में बंटे पार्षद, विकास पर संकट?

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। बिहारशरीफ नगर निगम इन दिनों राजनीतिक वर्चस्व चरम है। सशक्त की चुनाव के बाद वार्ड पार्षदों का दो खेमा हो गया है। दोनों खेमे में अहंम टकरा है। दोनों खेमे के लोग नगर निगम के हर निर्णय पर हावी होना चाह रहें है। दोनों गुटों द्वारा अपने को श्रेष्ट मान रहें है।

विकास कार्यों से अधिक आंतरिक खींचतान और गुटबाजी की चर्चाओं को लेकर सुर्खियों में है। शहर के विभिन्न इलाकों में सड़क, नाला, सफाई, जलनिकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर नागरिक लगातार शिकायतें कर रहे हैं। ऐसे में नगर निगम की कार्यशैली और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि नगर निगम का मुख्य उद्देश्य शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। कई वार्डों में अधूरे पड़े कार्य, जलजमाव की समस्या और सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। नागरिकों का आरोप है कि जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने के बजाय निगम के भीतर गुटबाजी और आपसी खींचतान का माहौल बना हुआ है।

शहर में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कुछ ऐसे लोग नगर निगम के निर्णयों और कार्यों पर प्रभाव डाल रहे हैं, जिनका किसी संवैधानिक या निर्वाचित पद से सीधा संबंध नहीं है। इसको लेकर आम नागरिकों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों से जुड़े कार्यों में गैर-निर्वाचित व्यक्तियों की भूमिका आखिर कितनी उचित है।

इसी बीच मेयर और डिप्टी मेयर की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि जब जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर जनप्रतिनिधियों को चुना है, तो जवाबदेही भी उन्हीं की बनती है। लोगों के बीच यह चर्चा है कि यदि जनप्रतिनिधियों के परिजन या करीबी लोग कार्यालयों में बैठकर प्रभाव डालते हैं या कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं, तो इससे प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।

"How long will the economy survive on litchis and makhanas? Small businesses are demanding answers from the Bihar government." "Tourism has increased, but employment hasn't! Jansuraj poses significant questions to the government."

कई नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि नगर निगम में बढ़ती पैरवी, सिफारिश और कथित दलाली की संस्कृति के कारण आम लोगों के कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं। उनका कहना है कि विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है कि निर्णय प्रक्रिया पारदर्शी हो और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

हालांकि इन आरोपों और चर्चाओं पर नगर निगम प्रशासन या संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन शहर में चल रही चर्चाओं ने यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि जनता अब विकास कार्यों की गति, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अधिक सजग हो गई है।

अब शहरवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर निगम विकास और जनसेवा के अपने मूल उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करता है या फिर गुटबाजी और राजनीतिक खींचतान की चर्चाएं आगे भी सुर्खियों में बनी रहती हैं। जनता की अपेक्षा है कि शहर के विकास, स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले, ताकि बिहारशरीफ एक बेहतर और सुव्यवस्थित शहर के रूप में आगे बढ़ सके।

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