नालंदा में उर्वरक कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई, सोलह दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए

Written by Sanjay Kumar

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अखिलेंद्र कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।नालंदा जिले में किसानों को उचित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने तथा कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। जिला कृषि पदाधिकारी के नेतृत्व में मई माह के दौरान सभी अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों एवं प्रखंड कृषि पदाधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में उर्वरक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान उर्वरक वितरण व्यवस्था, स्टॉक पंजी, बिक्री रजिस्टर और किसानों को की जा रही बिक्री की गहन जांच की गई।


जांच के क्रम में कई प्रतिष्ठानों में अनियमितता सामने आई। पूर्व में दो उर्वरक दुकानों में गड़बड़ी पाए जाने पर उनके लाइसेंस निलंबित करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 5 मई 2026 को हुई विस्तृत समीक्षा और जांच में यह पाया गया कि कई प्रतिष्ठानों द्वारा एक ही किसान को निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में उर्वरक की बिक्री की गई। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए जिला कृषि विभाग ने 16 उर्वरक प्रतिष्ठानों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए तथा संबंधित संचालकों से स्पष्टीकरण मांगा गया।
निलंबित किए गए प्रतिष्ठानों में अयांश ट्रेडर्स, लक्ष्मी खाद भंडार, हरिनारायण खाद भंडार, किसान खाद भंडार, पूजा ट्रेडर्स, हरितक्रांति खाद भंडार, श्रीराम ट्रेडर्स और शुभम ट्रेडर्स सहित अन्य प्रतिष्ठान शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त चार अन्य प्रतिष्ठानों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। इनमें सागर इंटरप्राईजेज, माँ भवानी ट्रेडर्स, कृष्णा ट्रेडर्स तथा केशोपुर पंचायत पैक्स लिमिटेड शामिल हैं।

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जिला कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में उर्वरक की कोई कमी नहीं है। 6 मई 2026 को डीबीटी पोर्टल पर उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जिले में 8850 मीट्रिक टन यूरिया तथा 2402 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही निर्धारित मात्रा में उर्वरक खरीदें तथा किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी या अनियमितता की सूचना तुरंत कृषि विभाग को दें।
जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा। दोषी पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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