संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। स्थानीय ब्रिलिएंट ग्रुप के विद्यालय सभागार में जल जीवन हरियाली अभियान के तहत प्रेरणादायक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी एवं गणमान्य लोग शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के निदेशक डॉ. धनंजय कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों को विद्यालय परिसर सहित अपने आसपास पौधारोपण के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर पौधा एक उम्मीद है और आने वाले भविष्य की हरियाली ही सच्ची आजादी होगी।
विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. शशि भूषण कुमार ने जल जीवन हरियाली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अभियान के पहले चरण में 3000 पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। अब अभियान को आगे बढ़ाते हुए 5000 पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में विद्यालय की ओर से 200 ऐसे बच्चों को पौधे दिए जा रहे हैं, जिनके घर या गांव में पौधारोपण के लिए जगह उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि पौधा केवल पेड़ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का आधार है। आज के बच्चों को आधुनिक शिक्षा और तकनीक के साथ परिवार, समाज, देश तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भी बोध होना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को जल, मिट्टी, पेड़ और वायु के महत्व से जोड़ने की अपील की।
विद्यालय की प्राचार्य डॉ. पुष्प लता विद्यार्थी ने कार्यशाला का थीम “एक पौधा मां के नाम, एक पौधा देश के नाम” प्रस्तुत किया। बच्चों के बीच आम, सागवान, महोगनी, आंवला, कटहल और जामुन सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे वितरित किए गए।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने नाटिका, संगीत और एकांकी प्रस्तुत कर जल संरक्षण एवं पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के मुख्य सलाहकार एवं वरिष्ठ शिक्षक पवन कुमार और रंजय सिंह ने बच्चों को पौधारोपण और पौधों की देखभाल के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
कार्यक्रम में शिक्षक किशोर पांडे, विजय कुमार, आनंद कुमार, नाजिम सर, राजकुमार सिंह, सतीश कुमार पांडे, राज किशोर सिंह, नाजिया खान, द्राक्षासना मैडम, मिलन मैडम, चांपा मैडम, सीमा मैडम, आरसी मिस, सोनम मिस, संध्या मिस, चांदनी मिस, सिमरन मिस, दीपू मिस, सृष्टि मिस एवं हिना खान सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय योगदान दिया। कार्यशाला ने विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता की भावना को मजबूत किया।







