श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के भावपूर्ण वर्णन से भक्तिमय हुआ इस्लामपुर, ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गूंजा सभागार

Written by Sanjay Kumar

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मोहम्मद जियाउद्दीन
इस्लामपुर (अपना नालन्दा)। इस्लामपुर नगर के गयाजी रोड स्थित वृन्दावन वाटिका के विशाल सभागार में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का सोमवार को भक्तिमय वातावरण में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन वृंदावन धाम से पधारीं सुप्रसिद्ध भागवत कथा व्यास पूज्या डॉ. लवी मैत्रेयी शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का अत्यंत मार्मिक, भावपूर्ण एवं भक्तिरस से परिपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं सहित भक्तजन उपस्थित रहे। कथा के दौरान पूरा सभागार “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गुंजायमान होता रहा।
कथावाचिका डॉ. लवी मैत्रेयी शर्मा ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतार की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि भक्तों के कल्याण, धर्म की पुनः स्थापना और संसार में प्रेम एवं सद्भाव का संदेश देने के लिए हुआ। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को कथा सुनाते हुए भगवान शुकदेव जी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के माध्यम से मानव जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को सरल रूप में समझाया।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव, गोकुल आगमन, पूतना वध, शकटासुर एवं तृणावर्त के उद्धार, माखन चोरी, यशोदा मैया द्वारा भगवान के मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन तथा उखल बंधन जैसी बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। भगवान की इन लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कई अवसरों पर पूरा सभागार भक्ति के रंग में डूब गया और श्रद्धालुओं ने जयघोष कर वातावरण को कृष्णमय बना दिया।

बाल लीलाओं में छिपा है प्रेम और समर्पण का संदेश
पूज्या डॉ. लवी मैत्रेयी शर्मा ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला अपने आप में एक गहरा आध्यात्मिक संदेश समेटे हुए है। भगवान की बाल लीलाएं मनुष्य को प्रेम, भक्ति, सरलता, वात्सल्य और पूर्ण समर्पण का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल रूप में भी संसार को यह संदेश दिया कि परमात्मा को पाने के लिए अहंकार नहीं, बल्कि निश्छल प्रेम और सच्ची भक्ति आवश्यक है।
यशोदा मैया द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन किए जाने की लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान की माया और उनकी शक्ति को समझ पाना मनुष्य के लिए संभव नहीं है। वहीं उखल बंधन की लीला के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान प्रेम के बंधन में बंध जाते हैं। माता यशोदा का वात्सल्य और भगवान श्रीकृष्ण की बाल सुलभ चंचलता भक्त और भगवान के बीच प्रेम के अद्भुत संबंध को दर्शाती है।
शुकदेव जी और राजा परीक्षित का प्रसंग सुनाया
कथा के दौरान कथावाचिका ने भगवान शुकदेव जी एवं राजा परीक्षित के प्रसंग का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने अपने जीवन के अंतिम समय में सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भगवान की कथा का श्रवण किया। भगवान शुकदेव जी ने उन्हें श्रीमद्भागवत महापुराण का ज्ञान प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के भीतर सकारात्मक परिवर्तन लाता है। कथा के माध्यम से व्यक्ति को अपने जीवन के उद्देश्य को समझने और परमात्मा के प्रति अपनी आस्था को मजबूत करने का अवसर मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि कथा को केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कथा से प्राप्त संदेशों को अपने आचरण और व्यवहार में उतारना ही वास्तविक उद्देश्य है।
प्रेम, करुणा और सेवा का जीवन अपनाने का आह्वान
पूज्या कथावाचिका ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने प्रेम, करुणा, सेवा, विनम्रता, सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए मनुष्य यदि भगवान के प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखे तो उसका जीवन सार्थक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। कथा के श्रवण से मनुष्य के भीतर भक्ति का भाव जागृत होता है और उसे जीवन की वास्तविकता को समझने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि कथा के श्रोता और वक्ता दोनों का उद्धार होता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धा एवं विश्वास के साथ भगवान की कथा का श्रवण करना चाहिए और उसके संदेश को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु, आरती व प्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन
सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन कथा समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर भावपूर्ण कीर्तन किया। भक्ति संगीत और जयघोष से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। महिला श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव में झूमते हुए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

इसके बाद विधिवत भगवान श्रीकृष्ण की आरती की गई। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान से परिवार एवं समाज के सुख-शांति की कामना की। आरती के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
इस प्रकार वृन्दावन वाटिका में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। अंतिम दिन तक श्रद्धालुओं में कथा के प्रति उत्साह बना रहा और पूरे आयोजन के दौरान वृन्दावन धाम से आईं कथावाचिका डॉ. लवी मैत्रेयी शर्मा के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत की कथा सुनकर भक्तों ने आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।

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