संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। जनसूराज के व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कुमार विभूति ने बिहार सरकार के समक्ष पर्यटन, रोजगार, छोटे व्यवसायियों और औद्योगिक विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हजारों छोटे दुकानदार, ठेला-खोमचा विक्रेता, हस्तशिल्प कारोबारी और स्थानीय स्वरोज़गार से जुड़े लोग अपनी आजीविका चलाते हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर उनके लिए व्यवस्थित वेंडर जोन या स्थायी बाजार की व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि वेंडर जोन के अभाव में छोटे और कमजोर व्यवसायियों को प्रशासनिक कार्रवाई, अतिक्रमण हटाने की चेतावनी, जुर्माना और उत्पीड़न जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और पर्यटन से मिलने वाले आर्थिक लाभ का पूरा फायदा स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच पाता।
उपेंद्र कुमार विभूति ने सवाल उठाया कि जब देश के कई राज्यों में प्रमुख पर्यटन स्थलों पर वेंडर जोन, फूड कोर्ट और स्थानीय उत्पादों के लिए विशेष बाजार विकसित किए जा चुके हैं, तब बिहार के पर्यटन स्थलों पर ऐसी व्यवस्था अब तक क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल दर्शनीय स्थलों के निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोज़गार के अवसर भी सृजित होने चाहिए।
उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर कब तक छोटे दुकानदार और गरीब व्यवसायी अस्थायी व्यवस्था के भरोसे अपना रोजगार चलाते रहेंगे। साथ ही यह भी जानना चाहा कि क्या राज्य के प्रत्येक प्रमुख पर्यटन स्थल पर स्थायी वेंडर जोन, पार्किंग, शौचालय और स्थानीय उत्पाद बाजार विकसित करने की कोई समयबद्ध योजना सरकार के पास है या नहीं।
व्यवसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ने बिहार में उद्योग और निवेश की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विशाल युवा आबादी और पर्याप्त श्रमशक्ति होने के बावजूद राज्य निवेश और औद्योगिक विकास के मामले में अपेक्षित प्रगति नहीं कर सका है। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या केवल लीची, केला, मखाना, बालू और कुछ कृषि उत्पादों के सहारे बिहार की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।

उन्होंने स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और ग्रामीण उद्यमों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों की जानकारी भी मांगी। साथ ही यह सवाल भी उठाया कि अन्य राज्यों की तरह बिहार के उत्पादों को व्यापक पहचान और ब्रांडिंग दिलाने में अब तक अपेक्षित सफलता क्यों नहीं मिल सकी है।
उपेंद्र कुमार विभूति ने कहा कि रोजगार के सीमित अवसरों के कारण बिहार के लाखों युवाओं को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है। उन्होंने सरकार से पर्यटन, कृषि और उद्योग को एकीकृत कर रोजगार सृजन की व्यापक रणनीति सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार पर्यटन स्थलों पर स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोज़गार आधारित बाजार विकसित करने को तैयार है।
उन्होंने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए भूमि उपलब्धता, बिजली आपूर्ति, परिवहन सुविधाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक सरल और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा इस दिशा में अब तक हुई उपलब्धियों का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की।
जनसूराज के प्रमुख सुझाव
उपेंद्र कुमार विभूति ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधुनिक वेंडर जोन विकसित किए जाएं। स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी केंद्र स्थापित किए जाएं तथा पर्यटन स्थलों को हस्तशिल्प और स्थानीय खाद्य उत्पादों के बाजार से जोड़ा जाए।
उन्होंने जिला स्तर पर छोटे उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज, युवाओं के लिए पर्यटन आधारित स्वरोज़गार योजनाएं, बिहार के प्रमुख उत्पादों की ब्रांडिंग एवं विपणन के लिए अलग प्राधिकरण तथा निवेशकों के लिए प्रभावी सिंगल विंडो व्यवस्था लागू करने की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने प्रत्येक जिले में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए स्थायी हाट एवं मार्केट कॉम्प्लेक्स विकसित करने तथा छोटे और कमजोर व्यवसायियों को कानूनी सुरक्षा एवं पहचान पत्र उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि यदि पर्यटन, कृषि और उद्योग को एकीकृत करते हुए रोजगार सृजन का मॉडल विकसित किया जाए तो बिहार आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकता है और राज्य से होने वाले पलायन में भी कमी लाई जा सकती है। जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट नीति और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करनी चाहिए।
— उपेंद्र कुमार विभूति, प्रदेश अध्यक्ष, व्यवसायिक प्रकोष्ठ, जनसूराज बिहार





