— आलेख : प्रो. श्याम नंदन प्रसाद
पर्यावरणविद् एवं मुख्य समन्वयक, वनस्पति शास्त्र विभाग
नालंदा खुला विश्वविद्यालय, नालंदा, बिहार
भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, कुशल रणनीतिकार, राष्ट्रभक्त तथा वर्तमान में बिहार के राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) का व्यक्तित्व बहुआयामी है। उन्होंने लगभग चार दशकों तक भारतीय सेना में अपनी उत्कृष्ट सेवाएं देकर राष्ट्र की सुरक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग और सतत विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करती है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि राष्ट्र सेवा और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।
भारतीय सेना में अपने लगभग 40 वर्षों के गौरवशाली कार्यकाल के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन ने देश के अनेक संवेदनशील क्षेत्रों में नेतृत्व किया। विशेष रूप से सियाचिन ग्लेशियर, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उनकी सेवाएं सदैव स्मरणीय रहेंगी। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, विषम मौसम और जटिल सुरक्षा चुनौतियों के बीच उन्होंने अपने अद्वितीय नेतृत्व, सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। उनके नेतृत्व में सेना ने केवल सुरक्षा दायित्वों का ही सफल निर्वहन नहीं किया, बल्कि स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास एवं सहयोग का वातावरण भी विकसित किया।
लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन का मानना रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी राष्ट्र की दीर्घकालिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। यही कारण है कि उन्होंने अपने सैन्य जीवन के दौरान वृक्षारोपण, स्वच्छता, जल संरक्षण तथा पर्यावरण-अनुकूल सैन्य गतिविधियों को विशेष महत्व दिया। कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में भी हरित वातावरण विकसित करने के उनके प्रयास उनकी दूरदर्शी सोच का परिचायक हैं।
भारतीय सेना में उच्च पदों पर रहते हुए उन्होंने यह संदेश दिया कि विकास और सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है। प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, जैव विविधता का संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों के प्रति उनकी गंभीर सोच उन्हें एक संवेदनशील पर्यावरण समर्थक के रूप में स्थापित करती है।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के पूर्व सदस्य के रूप में भी लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा आपदा प्रबंधन की प्रभावी रणनीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है, तब उनके विचार और अनुभव नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों तथा समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।
महामहिम राज्यपाल के विभिन्न सार्वजनिक संबोधनों, व्याख्यानों और लेखों में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का स्पष्ट संदेश दिखाई देता है। वे बार-बार इस बात पर बल देते हैं कि प्रकृति के साथ संतुलित संबंध बनाए बिना मानव समाज का भविष्य सुरक्षित नहीं रह सकता। उनका यह दृष्टिकोण आज की पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक मार्गदर्शन है।
वर्तमान में बिहार के राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में भी वे शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण को समान महत्व दे रहे हैं। विश्वविद्यालयों में पर्यावरणीय चेतना, वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण और सतत विकास के प्रति विद्यार्थियों को प्रेरित करने की दिशा में उनका मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका मानना है कि शिक्षण संस्थान केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं, बल्कि जिम्मेदार और पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिक तैयार करने के केंद्र होने चाहिए।
भारतीय सेना में विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कभी कम नहीं होने दी। यही कारण है कि राष्ट्र सेवा और प्रकृति संरक्षण का उनका समन्वित दृष्टिकोण आज अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो किसी भी जिम्मेदारी के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जा सकती है।
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को उनके उत्कृष्ट सैन्य नेतृत्व, राष्ट्र सेवा और विशिष्ट योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। किंतु उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि देशवासियों के मन में अर्जित वह सम्मान है, जो उनके समर्पण, सादगी, दूरदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा के कारण उन्हें प्राप्त हुआ है।
एक पर्यावरणविद् के रूप में मेरा स्पष्ट मत है कि लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन केवल भारत की सीमाओं के सजग प्रहरी ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के सच्चे संरक्षक भी हैं। राष्ट्र सुरक्षा, मानवीय मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण तथा सतत विकास के प्रति उनका समर्पण उन्हें एक आदर्श व्यक्तित्व बनाता है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है कि देश की सेवा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से भी की जा सकती है।







