बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। शैक्षिक सत्र 2026-27 में कक्षा चार से आठ के बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN) को मजबूत करने के उद्देश्य से नालंदा जिले में विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। इसी क्रम में बुधवार, 12 अगस्त को कॉलेजिएट उच्च विद्यालय, बिहारशरीफ में जिले के सभी 20 प्रखंडों से चयनित प्रशिक्षकों के लिए जिला स्तरीय एकदिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रत्येक प्रखंड से चार-चार चिन्हित प्रशिक्षकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। इस प्रकार जिले के 80 प्रशिक्षकों को FLN अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन एवं TaRL आधारित शिक्षण पद्धति के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
यह उन्मुखीकरण निदेशक, प्राथमिक शिक्षा, बिहार, पटना के पत्रांक 1959, दिनांक 24 जून 2026 तथा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्राथमिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा, नालंदा के पत्रांक 2558, दिनांक 5 अगस्त 2026 के निर्देश के आलोक में आयोजित किया गया।

बच्चों की बुनियादी क्षमता मजबूत करना उद्देश्य
कार्यक्रम के दौरान कक्षा चार से आठ के बच्चों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि बच्चों की भाषा और गणित की आधारभूत क्षमता मजबूत किए बिना उनकी आगे की पढ़ाई को प्रभावी बनाना चुनौतीपूर्ण है। इसलिए FLN अभियान के माध्यम से बच्चों के वर्तमान सीखने के स्तर की पहचान कर उसी के अनुरूप शिक्षण गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षा चार से आठ तक पहुंचने वाले बच्चों की पढ़ने, समझने, लिखने तथा गणित की मूलभूत अवधारणाओं पर पकड़ मजबूत हो। इसके लिए विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक गतिविधियों के साथ FLN कार्यक्रम को समेकित रूप से संचालित किया जाएगा।
TaRL पद्धति से होगा बच्चों का समूह निर्धारण
प्रशिक्षण के दौरान TaRL (Teaching at the Right Level) आधारित शिक्षण पद्धति पर विशेष जोर दिया गया। इस पद्धति के तहत बच्चों को उनकी कक्षा के बजाय उनके वास्तविक सीखने के स्तर के आधार पर समूहों में विभाजित कर शिक्षण कराया जाएगा।
प्रशिक्षकों को बताया गया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता और वर्तमान शैक्षणिक स्तर अलग-अलग हो सकता है। इसलिए एक ही कक्षा के सभी बच्चों को एक समान तरीके से पढ़ाने के बजाय उनके सीखने के स्तर का आकलन कर उपयुक्त समूह बनाया जाएगा। इसके बाद संबंधित समूह की आवश्यकता के अनुसार भाषा और गणित की गतिविधियां कराई जाएंगी।
इस पद्धति का उद्देश्य बच्चों को उनकी वर्तमान सीखने की स्थिति से आगे बढ़ाते हुए निर्धारित शैक्षणिक दक्षताओं तक पहुंचाना है। इससे कमजोर बच्चों को अतिरिक्त सहयोग मिलेगा और अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को भी उनकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
दक्षता आकलन और एसेसमेंट टूल्स की दी जानकारी
उन्मुखीकरण कार्यक्रम में बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन करने के लिए उपयोग किए जाने वाले दक्षता आकलन प्रपत्र एवं विभिन्न एसेसमेंट टूल्स के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों को बताया गया कि आकलन के माध्यम से बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक स्थिति की पहचान की जाएगी और उसी के आधार पर शिक्षण की रणनीति तैयार की जाएगी।
जिला स्तरीय मुख्य प्रशिक्षक सुनील कुमार तांती, क्रीत प्रसाद, डॉ. अभिनव कुमार, प्रशांत प्रियदर्शी एवं अनूप कुमार सिन्हा ने प्रशिक्षणार्थियों को FLN और TaRL से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जानकारी दी। प्रथम संस्था की प्रतिभा कुमारी एवं मनोज कुमार चौधरी ने भी प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक तकनीकी एवं व्यवहारिक पहलुओं को विस्तार से समझाया।
विद्यालय की नियमित गतिविधियों से जोड़ा जाएगा अभियान
प्रशिक्षण में बताया गया कि FLN अभियान को विद्यालय की नियमित दिनचर्या और शैक्षणिक कैलेंडर से जोड़कर संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि बच्चों को अतिरिक्त बोझ दिए बिना नियमित कक्षा शिक्षण के साथ ही उनकी बुनियादी क्षमताओं को मजबूत किया जा सके।
भाषा के क्षेत्र में बच्चों की पढ़ने, लिखने, सुनने और समझने की क्षमता पर काम किया जाएगा, जबकि गणित में संख्या ज्ञान, गणना, जोड़-घटाव, गुणा-भाग तथा अन्य आवश्यक आधारभूत अवधारणाओं को मजबूत करने पर जोर रहेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य से जुड़ा अभियान
अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। बच्चों की बुनियादी सीखने की क्षमता मजबूत होने से वे आगे की कक्षाओं में विषयों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
TaRL आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की वर्तमान सीखने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसका अंतिम उद्देश्य बच्चों को उच्च कक्षाओं के लिए शैक्षणिक रूप से सक्षम बनाना तथा उनकी सीखने की बुनियाद को मजबूत करना है।
विद्यालय से जिला स्तर तक होगा क्रियान्वयन
जिला सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी कृष्णा प्रसाद दास ने FLN कार्यक्रम को विद्यालय, संकुल, प्रखंड एवं जिला स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किए जाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को बताया कि कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी स्तरों के पदाधिकारियों, शिक्षकों और प्रशिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन, समूह निर्माण और नियमित शिक्षण गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। वहीं संकुल और प्रखंड स्तर से कार्यक्रम की निगरानी एवं आवश्यक सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। जिला स्तर पर पूरे अभियान की प्रगति की समीक्षा और आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा।
शिक्षकों की भूमिका होगी अहम
प्रशिक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि FLN अभियान की सफलता में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। शिक्षक बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति को समझकर उनके अनुरूप गतिविधियों का चयन करेंगे। नियमित आकलन के माध्यम से यह भी देखा जाएगा कि बच्चों के सीखने के स्तर में कितना सुधार हुआ है।
जिला स्तरीय उन्मुखीकरण के बाद प्रशिक्षित कर्मियों के माध्यम से प्रखंड एवं विद्यालय स्तर पर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि TaRL आधारित शिक्षण और नियमित आकलन के माध्यम से कक्षा चार से आठ के बच्चों की भाषा एवं गणित की बुनियादी दक्षताओं में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकेगा।
इस पहल के माध्यम से नालंदा जिले में बच्चों की सीखने की बुनियाद को मजबूत करने और उन्हें आगे की शिक्षा के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।







