हरेका में रेलकर्मियों का हुंकार, पुरानी पेंशन और वेतन बढ़ोतरी की मांग हुई तेज

Written by Sanjay Kumar

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हरिओम कुमार
हरनौत (अपना नालंदा)। स्थानीय बाजार स्थित सवारी डिब्बा मरम्मत कारखाना (हरेका) परिसर में रविवार को ईस्ट सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज यूनियन (ईसीआरईयू) की ओर से जन आंदोलन एवं जन कन्वेंशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रेलवे के निजीकरण, एनपीएस तथा चार नए श्रम कानूनों के विरोध के साथ रेलकर्मियों की विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की गई। इस दौरान कर्मचारियों को उनके अधिकारों और लंबित मांगों के प्रति जागरूक करते हुए एकजुटता का आह्वान किया गया।


कार्यक्रम की शुरुआत सुबह सात बजे कारखाना परिसर स्थित रेलवे क्वार्टर के कन्वेंशन हॉल से हुई। इसके बाद यूनियन से जुड़े रेलकर्मियों ने विभिन्न रेलवे क्वार्टरों में भ्रमण कर जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान कर्मचारियों और उनके परिजनों को यूनियन की मांगों तथा रेलवे कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों की जानकारी दी गई। जागरूकता अभियान के दौरान विभिन्न मांगों के समर्थन में नारे लगाए गए और गीतों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। इसके बाद सभी रेलकर्मी पुनः कन्वेंशन हॉल पहुंचे, जहां कार्यक्रम का समापन किया गया।
इस अवसर पर ईसीआरईयू के अध्यक्ष राजीव रंजन कुमार ने कहा कि रेलवे कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ईस्ट सेंट्रल रेलवे के अंतर्गत आने वाले सभी पांच मंडलों एवं उत्पादन इकाइयों में जन कन्वेंशन आयोजित कर रेलकर्मियों को एकजुट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों और सुविधाओं में किसी तरह की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी।
यूनियन ने पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने और एनपीएस को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई। इसके अलावा चारों नए श्रम कानूनों को वापस लेकर पुराने श्रम कानूनों को लागू करने, सातवें वेतन आयोग के आधार पर 46,157 रुपये बोनस देने तथा आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट को अविलंब लागू करने की मांग की गई।
रेल कर्मचारियों ने फिटमेंट फैक्टर न्यूनतम 3.33 के आधार पर न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 60 हजार रुपये करने की मांग भी रखी। इसके साथ रेलवे में लंबे समय से रिक्त पड़े सभी पदों पर तत्काल भर्ती करने तथा नए कार्यों, ट्रेनों की बढ़ती संख्या और उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप नए पद सृजित कर नियमित नियुक्ति करने की मांग की गई।
यूनियन ने रेलवे के कार्यों को निजी कंपनियों को सौंपने का विरोध करते हुए कहा कि रेलवे के काम रेलकर्मियों से ही कराए जाएं। आउटसोर्सिंग और ठेका कर्मियों की जगह पर्याप्त संख्या में नियमित कर्मचारियों की बहाली करने की मांग भी की गई। इसके अलावा ड्यूटी आवर्स का कड़ाई से आठ घंटे पालन कराने, एलडीसीई को ओपन-टू-ऑल करने तथा ट्रैक मेंटेनर और लाइन कर्मचारियों को जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध कराने की मांग रखी गई।
जन कन्वेंशन में रेलकर्मियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। सभी मंडल रेल अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, आवश्यक जांच एवं अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था करने तथा पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों और जरूरी चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई।
महिला रेलकर्मियों के लिए रेलवे सहित सार्वजनिक उपक्रमों में कॉमन रूम तथा विशेष अवकाश की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई। वहीं रेलकर्मियों के माता-पिता के लिए मेडिकल सुविधा एवं अन्य जरूरी सुविधाओं को फिर से बहाल करने की मांग भी यूनियन की ओर से रखी गई।
रनिंग स्टाफ से जुड़े मुद्दों को लेकर भी कर्मचारियों ने अपनी मांगें सामने रखीं। निर्धारित कार्यप्रणाली का कड़ाई से पालन कराने, 36 घंटे के अंदर मुख्यालय वापसी सुनिश्चित करने तथा ट्रैक मशीन स्टाफ, असिस्टेंट लोको पायलट और टीआरडी स्टाफ को रिस्क अलाउंस देने की मांग की गई।
कार्यक्रम में बिपिन बिहारी पंडित, मंटू पासवान, रामाशीष पासवान, दिलीप कुमार सिंह, धनजी, रबिंदर कुमार सिंह, कोटणीस, नंदेलाल, रंजीत कुमार, अखिलेश कुमार, रबीशंकर कुमार, अमित कुमार, हिमांशु कुमार, बब्लू कुमार, मनीष कुमार, विनोद कुमार, शत्रुधन मंडल, अरुण कुमार, विवेक कुमार, रविरंजन कुमार, उपेंद्र कुमार, राजीव कुमार समेत दर्जनों रेलकर्मी मौजूद रहे।

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