मलमास मेला 2026: सर्कस और थियेटर के साउंड पर क्या चलेगी प्रशासन की कैंची?

Written by Sanjay Kumar

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राजेश कुमार गौतम
नालंदा (अपना नालंदा)। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में आगामी 17 मई से शुरू होने वाले ऐतिहासिक एवं धार्मिक मलमास मेले को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। 15 जून तक चलने वाले इस एक माह के राजकीय मेले की तैयारियां प्रशासन स्तर पर जारी हैं, लेकिन इस बार नगरवासियों और व्यवसायियों के बीच सबसे बड़ी चर्चा का विषय ‘साउंड सिस्टम’ बना हुआ है।दरअसल, हाल के दिनों में शादी-विवाह और लग्न के मौसम के दौरान नालंदा जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया था। तेज आवाज में डीजे बजाने वाले कई संचालकों पर प्राथमिकी दर्ज की गई और उनके कीमती उपकरण जब्त किए गए। प्रशासन की इस सख्ती का असर शादी समारोहों की रौनक पर भी दिखा था।कानून की समानता पर उठ रहे सवाल अब स्थानीय नागरिकों और मेला प्रेमियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन वही सख्ती मलमास मेले में भी दिखाएगा? मेले का मुख्य आकर्षण रहने वाले सर्कस, थिएटर, आसमानी झूला, मौत का कुआँ और मीना बाजार की दुकानों में दिन-रात ऊँची आवाज में लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम का उपयोग होता है। लोगों का तर्क है कि यदि उच्च न्यायालय के निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण नियमों का हवाला देकर शादियों में डीजे बंद कराए गए, तो क्या मेले के शोर-शराबे पर भी वही नियम लागू होंगे?

Malmas Mela 2026: Alert Issued Regarding Crowd Risks; Major Plan Formulated for Rajgir Zoo Safari


भेदभाव की आशंका और प्रशासन की चुनौती
नगरवासियों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। यदि धार्मिक मेले की गरिमा और शांति व्यवस्था बनाए रखनी है, तो प्रशासन को ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को लेकर पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि क्या इस बार मलमास मेला ‘शांतिपूर्ण’ होगा या फिर मनोरंजन के साधनों को ध्वनि नियमों से छूट मिलेगी।फिलहाल, सबकी निगाहें जिला प्रशासन और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के आगामी आदेशों पर टिकी हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन परंपरा, मनोरंजन और कानून के बीच कैसे तालमेल बिठाता है।

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