केवीके में 48 सप्ताह की ट्रेनिंग पूरी,40 प्रशिक्षुओं को मिला प्रशिक्षण

Written by Sanjay Kumar

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हरिओम कुमार
हरनौत(अपना नालंदा)।स्थानीय बाजार में स्थित केवीके में नालंदा व आसपास के जिलों के मैट्रिक पास 40 प्रतिभागिय के पहले बैच की 48 सप्ताह कि ट्रेनिंग पूरी हो गई। वे अब कृषि इनपुट डीलर के रुप में काम करेंगे, जिसमें बीज, उर्वरक व कीटनाशकों के अधिकृत विक्रेता होंगे। केवीके के माध्यम से प्रतिभागियों की 48 सप्ताह की ट्रेनिंग पूरी होने पर सर्टिफिकेट दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान केवीके के आलावा एक्सपोजर विजिट कार्यक्रम भी चला।वहीं
प्रशिक्षण समन्वयक सह मृदा विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ यूएन उमेश ने बताया कि रोजगार सृजन के साथ किसानों तक कृषि की आधुनिक व उन्नत तकनीकों को पहुंचाने के लिए हैदराबाद के मैनेज द्वारा प्रायोजित देसी तकनीक की ट्रेनिंग दी गई है। कृषि एवं प्रसार सेवा में डिप्लोमा के इस कोर्स को पूरा करने के बाद प्रतिभागी कृषि इनपुट डीलर का लाइसेंस प्राप्त करने के योग्य हो जायेंगे।

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समापन सत्र में नूरसराय स्थित उद्यान महाविद्यालय नालंदा के प्राचार्य डॉ रंधीर कुमार ने प्रतिभागियों को उनके कामकाज का आधार बताया। उन्होंने कहा कि कृषि कार्य में किसी तरह की समस्या होने पर किसान सबसे पहले इनपुट डीलर के पास ही जाते हैं। इस वजह से इनपुट डीलरों को क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, मिट्टी व पानी की प्रकृति के हिसाब से बीज, उर्वरक और कीटनाशकों के उपयोग की जानकारी होना आवश्यक है। ताकि वे किसानों को कृषि इनपुट उपलब्ध कराने के साथ उनका मार्गदर्शन भी कर सकें। प्राचार्य डॉ रंधीर ने बताया कि हमारा जिला आलू की खेती के लिए फेमस है। यहां 26 से 27 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। आलू के साथ यहां अन्य सब्जियों के उत्पादन की काफी संभावना है। जरुरी है कि किसान जलवायु अनुकूल खेती करें। इसमें उपलब्ध संसाधनों के आलोक में बीज आदि के चिन्हित प्रभेदों का ही व्यवहार करें। उन्होंने मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित उर्वरकों के व्यवहार पर भी जोर दिया।


कृषि अभियंत्रण के सहायक प्राध्यापक ईं मनीष कुमार ने कृषि यांत्रिकीकरण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मौसम में काफी उलटफेर देखने को मिल रहा है। जब पानी की जरुरत होती है तो सूखा अथवा बाढ़ की स्थिति बन जाती है। वैसे समय में यंत्रों का उपयोग कर हम समय से खेत की तैयारी, बीज की बुआई व फसल की कटनी कर सकते हैं। इससे समय के साथ लागत की बचत भी हो जाती है। कृषि यंत्रों से मिट्टी की जरुरत के अनुसार खुदाई की जाती है।इस दौरान केंद्र के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ सीमा कुमारी, गृह विज्ञान के विशेषज्ञ डॉ ज्योति सिन्हा, उद्यान विज्ञान के विशेषज्ञ कुमारी विभा रानी, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ विद्याशंकर सिन्हा ने प्रतिभागियों को विषय वस्तु के संबंध में उपयोगी जानकारी दी।

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