सुशासन, सुरक्षा और विकास पर सख्त निर्देश, अधिकारियों को मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश

Written by Sanjay Kumar

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अखिलेंद्र कुमार
पटना (अपना नालंदा)। राज्य के प्रशासनिक और पुलिस तंत्र को और अधिक जवाबदेह, संवेदनशील तथा प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को अधिवेशन भवन में राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के साथ एक दिवसीय कार्यशाला एवं समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति, विधि-व्यवस्था की स्थिति, जनसेवा से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक पदाधिकारियों की भूमिका राज्य के विकास और सुशासन की स्थापना में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने 27 वर्षों के राजनीतिक अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने यह महसूस किया है कि यदि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक प्रभावी ढंग से कार्य करें तो आम जनता की समस्याएं स्वतः कम हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि एक मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था ही जनता को राहत और भरोसा देती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में कई अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया गया है, जिससे प्रशासन को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया गया है। वहीं राज्य में नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले दो दशकों में कानून-व्यवस्था, सड़क, बिजली और बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों को और मजबूत करने की जिम्मेदारी अब अधिकारियों पर है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून का राज स्थापित करना है। उन्होंने दो टूक कहा कि अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता के प्रति किसी प्रकार की सहनशीलता नहीं बरती जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ऐसा माहौल बनाएं जिससे राज्य में आने वाले लोगों को सुशासन का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे। उन्होंने कहा कि “सुशासन केवल नीति नहीं, बल्कि जनता के अनुभव का विषय होना चाहिए।”
उद्योग और निवेश को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 20 नवंबर 2025 तक राज्य में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए अधिकारियों को उद्योगपतियों को सुरक्षा और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत स्तर पर निवेशकों को भरोसा दिलाते हैं, तो उद्योग तेजी से स्थापित होंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
जनता से सीधा संवाद स्थापित करने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक अपने कार्यालय में बैठकर आम लोगों की समस्याएं सुनें और उनका समाधान करें। उन्होंने कहा कि जितना अधिक अधिकारी जनता से जुड़ेंगे, उतना ही बेहतर तरीके से वे जिले के विकास की दिशा तय कर पाएंगे।

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सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और व्यवस्थित कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा दुर्घटना पीड़ित परिवारों को 4 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है, लेकिन इसके साथ-साथ दुर्घटनाओं की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने “पुलिस दीदी” योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चियां सुरक्षित तरीके से स्कूल जाएं और वापस लौटें। भागलपुर में एक कार्यपालक पदाधिकारी की शहादत का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे दुःखद बताया और उनके परिजनों को 25 लाख रुपये की सहायता देने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार अपने कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों के साथ हमेशा खड़ी है और अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
शराबबंदी कानून के सख्त अनुपालन पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह समाप्त किया जाए। उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने का निर्देश दिया और चेतावनी दी कि यदि कोई पुलिस या प्रशासनिक कर्मी ऐसे अवैध कार्यों में संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पंचायत स्तर पर प्रशासनिक पहुंच बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को “सहयोग शिविर” आयोजित करने की घोषणा की। इन शिविरों में प्राप्त शिकायतों का निपटारा 30 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट कहा कि जनता को अनावश्यक रूप से परेशान करने या मामलों को लंबित रखने की प्रवृत्ति को समाप्त करें।
मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ब्लॉक, अंचल और थाना स्तर पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इन संस्थानों की प्रतिदिन निगरानी की जाएगी, जिससे कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और जवाबदेही बढ़ेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर करने की प्रवृत्ति को समाप्त किया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि 1 जुलाई तक सभी जिला अस्पतालों और 15 अगस्त तक अनुमंडल अस्पतालों को इतना सक्षम बनाया जाए कि अधिकांश बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सके।
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए मुख्यमंत्री ने सभी प्रखंडों में मॉडल स्कूल स्थापित करने का निर्देश दिया, जिन्हें नेतरहाट और सिमुलतला विद्यालय की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक प्रखंड में डिग्री कॉलेज खोलने और वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
रोजगार के क्षेत्र में सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले पांच वर्षों में 1 करोड़ लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सभी अधिकारी पूरी निष्ठा से कार्य करें तो यह संख्या 5 करोड़ तक पहुंच सकती है।
जनगणना और सामाजिक सर्वेक्षण को लेकर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी परिवारों का सही-सही विवरण दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी पात्रता के अनुसार सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में कम से कम 50 पर्यटन स्थलों की पहचान कर उन्हें विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रचारित करना आवश्यक है।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की प्रगति ही देश की प्रगति का आधार है। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे अपने अनुभव और समर्पण के साथ राज्य को विकास के नए आयाम तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से ही अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, पुलिस महानिदेशक (ऑपरेशन) कुंदन कृष्णन सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, प्रमंडलीय आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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