डीएम नालंदा का ड्रीम प्रोजेक्ट पर्ल फार्मिंग, 40 किसान हुए दक्ष
किसानों को नवाचारी के साथ साथ उद्यमी बनाना कृषि विभाग का उद्देश्य – डीएओ
अखिलेंद्र कुमार
बिहारशरीफ(अपना नालंदा)। जिले के किसानों की किस्मत अब मोतियों की तरह चमक उठेगी। डीएम नालंदा का ड्रीम प्रोजेक्ट मोती की खेती की प्रशिक्षण के लिए आत्मा नालंदा की ओर से जिले के 40 किसानों को नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी सिलीगुड़ी भेजा गया। जहां सात दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे किसानों के चेहरे पर एक अलग ही चमक और उत्साह दिख रही है।
इसी क्रम में प्रशिक्षण प्राप्त कर वापस लौटे फार्मर ऑफ द ईयर अवार्ड से सम्मानित प्रज्ञा कृषक हित समूह तिलैया-बड़हरी राजगीर के अध्यक्ष वीर अभिमन्यु सिंह ने बताया कि मोती की खेती मीठे पानी की सीपों के अंदर कृत्रिम रूप से मोती तैयार करने का एक अत्यधिक लाभदायक व्यवसाय है।
सबसे पहले 8 से 10 सेंटीमीटर का वयस्क और स्वस्थ्य सीप का चयन करते हैं। उसके बाद सीप की सर्जरी कर कृत्रिम नाभिक ( न्यूक्लियस) डाला जाता है। नाभिक डालने के बाद सीप में जलन होती है। जिसके कारण सीप में NACRE नामक लार्वा का स्राव होता है जो धीरे-धीरे नाभिक के ऊपर परत दर परत जमते जाता है। और 18 से 20 महीने में कृत्रिम मोती बनकर तैयार हो जाती है। जिसकी कीमत₹300 से लेकर ₹1500 रुपए तक होती है।
लागत :
मोती की खेती बड़े तलाबों के अलावा आर्टिफिशियल तालाबों, सीमेंट की बनी टैंक या हौज में भी किया जा सकता है। 8 X 10 फीट का आर्टिफिशियल तालाब में 500 सीपों के साथ छोटे स्तर पर 50 से 60 हजार की लागत से शुरू की जा सकती है।
मुनाफा :
एक सीप से एक या दो मोती बनाए जा सकते हैं। जिनकी कीमत आकार और गुणवत्ता के आधार पर होती है। एक सीप से ₹300 से लेकर ₹1500 तक आमदनी हो सकती है। सीप का आकार जितना बड़ा होगा मोती का आकार भी उतना ही बेहतर होगा।

बाजार :
श्री अभिमन्यु ने बताया कि मोती की खेती के किसानों के लिए बाजार की कमी नहीं है। जिस तरह सोना महंगा होने से रोल गोल्ड का मांग अधिक है। उसी तरह प्राकृतिक मोती बहुत अधिक महंगी होने के कारण कृत्रिम मोती की मांग बहुत अधिक है।
प्रशिक्षण :
मोती की खेती के लिए उड़ीसा स्थित CIFA भुवनेश्वर या नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी सिलीगुड़ी से प्रशिक्षण लिया जा सकता है। नालंदा के इच्छुक किसान जिला पदाधिकारी या जिला कृषि पदाधिकारी से संपर्क कर निशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।

उपयुक्त समय :
मोती की खेती के लिए अक्टूबर से दिसंबर का महीना सबसे उपयुक्त समय होता है।
सब्सिडी : सरकारी योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सब्सिडी दी जाती है।
कृषि विभाग का हमेशा यह प्रयास रहा है कि किसान परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करें। किसानों को नवाचारी बनाना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है। ईच्छुक सभी किसानों को पर्ल फार्मिंग का निःशुल्क प्रशिक्षण दिलाना हमारा प्रयास होगा।
नितेश कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी नालंदा।







