प्रज्ञा कृषक हित समूह तिलैया-बड़हरी ने किया फागुनोत्सव का आयोजन

Written by Sanjay Kumar

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महिला कृषक उद्यमियों ने खेली फूलों वाली होली

संजय कुमार
बिहारशरीफ(अपना नालंदा)। राजगीर प्रखंड के बड़हरी गांव में सुनिल प्रसाद के घर पर रविवार को प्रज्ञा कृषक हित समूह तिलैया-बड़हरी द्वारा फागुनोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें ग्रामीण महिला कृषकों व उद्यमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा ली और जमकर होली मिलन का लुत्फ उठायी।
इस गांव की यह पहली और नायाब होली मिलन आयोजित की गई। इस होली मिलन में पहले तो एक दूसरे को गुलाल लगायी। भेदभाव भुलाकर आपस में एक-दूसरे पर फूल की बारिश की। खाटूश्यामजी के गीतों पर थिरकते हुए भाव विभोर होकर जमकर लुत्फ उठाया। इसमें समूह के सदस्यों के अलावा गांव घर की दर्जनों महिलाओं ने होली मिलन का आनंद उठाया।
इस संबंध में बड़हरी की समूह की कोषाध्यक्ष महिला कृषक बिभा कुमारी ने बताया कि हम सभी को करीब पच्चीस तीस साल यहां आये हो गया है। अभी तक गांव देहात में होली से पूर्व इस तरह की फूलों वाली साफ सुथरी महिलाओं की होली मिलन हमने नहीं देखा। जहां गांव की महिलाएं एक स्थान पर इक‌ट्ठा होकर एक दूसरे को गुलाल लगायी हो और एक दूसरे के गले लगी हो। फूलों की होली हमलोगों ने पहली बार खेली है।
समूह के अध्यक्ष सह प्राकृतिक खेती के जिला निगरानी समिति के सदस्य वीर अभिमन्यु सिंह ने बताया कि होली उमंग, उत्साह, प्रेम, सौहार्द व मिलन का प्रतीक है। इस तरह की फूलों वाली होली हमें भी गांवों में पहली बार देखने को मिला है। उसमें भी गांव की महिलाओं की होली मिलन की बात तो दुर्लभ प्रतीत होता है।
श्री सिंह ने कहा कि होली हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पारंपरिक त्योहार है, जो रंगों के माध्यम से लोगों को जोड़ता है। इस तरह की महिला किसानों की होली मिलन हर गांव में होना चाहिए। महिलाएं सुबह से लेकर रात तक खेती गृहस्थी के कार्यों में व्यस्त रहतीं हैं। जिससे उन्हें जीवन का वास्तविक आनंद नहीं मिल पाता है। और जीवन सिर्फ खाने और कमाने एवं बच्चों के लालन-पालन तक सीमित होकर रह जाती है। ऐसा देखा जाता है कि गांव में रहते हुए भी अपने गांवों की अन्य महिलाओं से मिलने में सालों बीत जाती है।
उन्होंने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि गांव की महिलाओं में छोटी-छोटी बातों को लेकर मनमुटाव बना रहता। इस तरह होली मिलन आपसी मतभेद और वैर की भावना को दूर करने में सहायक है।
इस मौके पर बड़हरी गांव की महिला कृषक मंजू कुमारी, फूलवा देवी, उर्मिला देवी, बेबी देवी, मीना देवी, बिभा देवी, गुड्ड्डी देवी, पिंकी देवी, कोसुम देवी, बबीता देवी, ब्यूटी देवी समेत दर्जनों महिलाएं शामिल हुई।

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