बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। जिले के स्थानीय निकाय शिक्षकों के समक्ष वेतन भुगतान का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बिहार सरकार निधि (जीओबी मद) से आच्छादित शिक्षकों का मार्च 2026 से तथा सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) मद से आच्छादित शिक्षकों का मई 2026 का वेतन अब तक लंबित है। आवंटन की कमी और सीएफएमएस की तकनीकी समस्याओं के कारण हजारों शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है।
बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला प्रभारी रीतेश कुमार ने बताया कि जिले के अधिकांश शिक्षकों ने विभिन्न बैंकों से ऋण ले रखा है। वेतन नहीं मिलने के कारण वे मासिक किस्त समय पर जमा नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनकी बैंकिंग साख प्रभावित होने के साथ विलंब शुल्क और अतिरिक्त ब्याज का बोझ भी बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वेतन भुगतान में देरी से शिक्षकों के परिवारों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कई शिक्षक अपने माता-पिता का समुचित इलाज नहीं करा पा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन में भी आर्थिक संकट बाधा बन रहा है।
रीतेश कुमार ने कहा कि लगातार बढ़ रही आर्थिक परेशानियों से शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है, जिसका असर उनकी कार्यक्षमता और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। शिक्षक संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से अविलंब पर्याप्त राशि उपलब्ध कराने तथा सीएफएमएस की तकनीकी त्रुटियों को दूर कर लंबित वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। संघ ने चेतावनी दी कि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो शिक्षकों का असंतोष आंदोलन का रूप ले सकता है।
वेतन भुगतान ठप, आर्थिक संकट से जूझ रहे स्थानीय निकाय शिक्षक
Written by Sanjay Kumar
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