बारिश ने खोली हरनौत कन्या मध्य विद्यालय की बदहाल व्यवस्था, पानी में डूबी पढ़ाई

Written by Sanjay Kumar

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राकेश कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। हरनौत प्रखंड क्षेत्र में बुधवार को हुई झमाझम बारिश ने एक ओर लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत दी, तो दूसरी ओर कई इलाकों में जलजमाव की गंभीर समस्या खड़ी कर दी। सबसे चिंताजनक स्थिति हरनौत बाजार स्थित कन्या मध्य विद्यालय में देखने को मिली, जहां बारिश का पानी विद्यालय परिसर के साथ-साथ कक्षाओं में भी प्रवेश कर गया। इससे छात्राओं की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो गई और शिक्षकों को भी पठन-पाठन संचालित करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
दोपहर करीब 2:15 बजे विद्यालय की प्रधानाध्यापिका महारानी देवी ने बताया कि विद्यालय लंबे समय से आधारभूत सुविधाओं की कमी और जर्जर भवन की समस्या से जूझ रहा है। बरसात शुरू होते ही विद्यालय की छत कई स्थानों से टपकने लगती है और थोड़ी सी बारिश में ही पूरा परिसर जलमग्न हो जाता है। इस बार भी तेज बारिश के कारण पानी कक्षाओं तक पहुंच गया, जिससे छात्राओं के लिए बैठकर पढ़ाई करना मुश्किल हो गया।
उन्होंने बताया कि विद्यालय में लगभग 300 छात्राओं का नामांकन है, जबकि प्रतिदिन 200 से अधिक छात्राएं नियमित रूप से पढ़ाई के लिए विद्यालय आती हैं। लेकिन पर्याप्त कक्षाओं का अभाव और भवन की जर्जर स्थिति के कारण बरसात के दिनों में पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित होती है। कई कमरों की छत से लगातार पानी टपकने के कारण छात्राओं को सुरक्षित स्थानों पर बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। कई बार एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को बैठाना पड़ता है, जिससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है।


विद्यालय परिसर में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी बाहर निकलने के बजाय विद्यालय के अंदर ही जमा हो जाता है। इससे छात्राओं और शिक्षकों को विद्यालय आने-जाने में भी परेशानी होती है। जलभराव के कारण फिसलने का खतरा बना रहता है और गंदा पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने की आशंका भी बढ़ जाती है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बना रहता है।
प्रधानाध्यापिका महारानी देवी ने बताया कि यह समस्या कोई नई नहीं है। प्रत्येक वर्ष बरसात के मौसम में विद्यालय की यही स्थिति हो जाती है। कई बार संबंधित अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं कराई गई तो पूरे वर्षा काल में छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती रहेगी।
बारिश के दौरान कई अभिभावक भी विद्यालय पहुंचे और विद्यालय की स्थिति देखकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि जर्जर भवन में बच्चों को पढ़ाना जोखिम भरा है। छत से लगातार टपकते पानी और कमरों में भरे पानी के बीच छात्राओं का बैठना किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर विद्यालय की स्थिति सुधारने की मांग की।
स्थानीय लोगों ने भी शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से विद्यालय की बदहाल स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि छात्राओं को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि विद्यालय भवन की शीघ्र मरम्मत कराई जाए, अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया जाए तथा परिसर में प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि बरसात के दिनों में छात्राओं की पढ़ाई बाधित न हो और वे सुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें।

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