डैफोडिल में हिन्दी दिवस पर दिखी साहित्य और संस्कृति की झलक, विद्यार्थियों ने जीता दिल

Written by Sanjay Kumar

Published on:

संजय कुमार

बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। हिन्दी दिवस के अवसर पर डैफोडिल ग्रुप ऑफ स्कूल्स, मंगलास्थान में सोमवार को ‘हिन्दी गौरव महोत्सव-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘भाषा, साहित्य और संस्कृति का संगम’ रखा गया। समारोह में विद्यालय के विद्यार्थियों ने हिन्दी भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति और देश की समृद्ध परंपराओं को अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत कर दिया। कवि सम्मेलन, काव्य पाठ, भाषण, नाटक, गीत-संगीत और नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों ने समारोह में चार चांद लगा दिए।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के चेयरमैन रंजीत प्रसाद सिंह एवं प्राचार्य डॉ. रविचंद कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही हिन्दी भाषा के महत्व, साहित्य की भूमिका और भारतीय संस्कृति की विविधता को लेकर आयोजित कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ। विद्यालय परिसर में हिन्दी दिवस को लेकर विशेष उत्साह का माहौल रहा। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान और गौरव की भावना व्यक्त की।

काव्य पाठ में दिखी रचनात्मक प्रतिभा

महोत्सव के दौरान आयोजित कवि सम्मेलन और काव्य पाठ में विद्यार्थियों ने अपनी लेखन एवं प्रस्तुति प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने देशभक्ति, प्रकृति, संस्कार, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदना और हिन्दी भाषा के महत्व से जुड़ी कविताओं का पाठ किया। भावपूर्ण एवं प्रभावशाली प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों को खूब प्रभावित किया और विद्यार्थियों की रचनाओं पर जमकर तालियां बजीं।

कई विद्यार्थियों ने अपनी मौलिक कविताओं के माध्यम से हिन्दी के प्रति प्रेम और अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। उनकी प्रस्तुति में हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान के साथ-साथ समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी दिखाई दिया।

भाषण प्रतियोगिता में हिन्दी के भविष्य पर मंथन

भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने ‘हिन्दी का वर्तमान एवं भविष्य’, ‘नई पीढ़ी और हिन्दी’ तथा ‘भारतीय संस्कृति में हिन्दी की भूमिका’ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। विद्यार्थियों ने कहा कि हिन्दी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय समाज की भावनाओं, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है।

विद्यार्थियों ने बदलते तकनीकी दौर में हिन्दी के सामने मौजूद चुनौतियों और संभावनाओं पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी यदि हिन्दी को आधुनिक तकनीक, शिक्षा और रचनात्मकता से जोड़े तो हिन्दी का भविष्य और अधिक समृद्ध हो सकता है।

गीत-संगीत और नृत्य ने बांधा समां

कार्यक्रम को और आकर्षक बनाने के लिए विद्यार्थियों ने गीत, समूह नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति की विविधता और हिन्दी की समृद्ध परंपरा की झलक देखने को मिली। गीत-संगीत की प्रस्तुतियों के साथ विद्यार्थियों के मनमोहक नृत्य ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।

नाटक के माध्यम से भी विद्यार्थियों ने हिन्दी भाषा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े संदेश को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। मंच पर विद्यार्थियों का आत्मविश्वास, संवाद अदायगी और अभिनय प्रतिभा दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रही।

हिन्दी हमारी संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान : प्राचार्य

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. रविचंद कुमार ने कहा कि हिन्दी हमारी संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रीय पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिन्दी दिवस जैसे आयोजनों का उद्देश्य केवल हिन्दी भाषा के प्रति औपचारिक सम्मान व्यक्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर भाषा के प्रति प्रेम, गौरव और आत्मीयता की भावना विकसित करना है।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और हिन्दी के साथ-साथ अन्य भाषाओं का भी सम्मान करना चाहिए। भाषा ज्ञान के विस्तार का माध्यम है और साहित्य संवेदनशील समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करते हैं तथा उनमें आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करते हैं।

उत्कृष्ट विद्यार्थियों को मिला सम्मान

कार्यक्रम के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान मिलने पर विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखा गया। विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

महोत्सव के सफल आयोजन में संजय कुमार, प्रीतम भास्कर, ज्योति मेहता, प्रिया कुमारी, अजीत कुमार, डॉ. महेंद्र कुमार, रीना कुमारी, नंदलाल प्रसाद, शाइमा परवीन, नैना रस्तोगी, विजेता कुमारी, कुमारी पूनम सिन्हा, सभ्यता चामलिंग, सदफ नियाज़, शबाना तबस्सुम, चंद्रभूषण शर्मा, दीपक कुमार, अतुल अभिलाष, ऋषिकेश कुमार, अविनाश कुमार, सत्यम, अवधेश कुमार पंडित, वंदना कुमारी, शिल्पा कुमारी, अनुषा रोपल, सुरभि राय, राधा कुमारी, अन्नू भारती, सुबेक्षा लेपचा, रेवत खवास, हिना कौसर, निर्मिषा चामलिंग, फलक आफरीन, खुशी, अनामिका सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा।

Leave a Comment