हरिओम कुमार
हरनौत (अपना नालंदा)। हरनौत नगर पंचायत क्षेत्र में पंचायत समिति मद की राशि से पीसीसी सड़क की ढलाई और चारदीवारी निर्माण कराए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रखंड उप प्रमुख प्रमोद कुमार ने इस निर्माण कार्य को नियमों के विपरीत बताते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को लिखित आवेदन सौंपकर आपत्ति जताई है। मामले की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, नालंदा और उप विकास आयुक्त, नालंदा को भी दी गई है।

उप प्रमुख ने अपने आवेदन में कहा है कि हरनौत नगर पंचायत क्षेत्र में प्रखंड मुख्यालय का कार्यालय परिसर तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी का सरकारी आवास स्थित है। इसी परिसर में हाल के दिनों में बीडीओ आवास की चारदीवारी निर्माण के साथ-साथ प्रखंड कार्यालय परिसर में आवागमन के लिए पीसीसी ढलाई का कार्य कराया गया है।
उनके अनुसार, पीसीसी ढलाई का काम प्रखंड मुख्यालय स्थित दीदी अधिकार केंद्र कार्यालय से लेकर अभिलेखागार कक्ष तक तथा बीडीओ आवास से प्रखंड नजारत कक्ष तक कराया गया है। इसके अलावा बीडीओ के सरकारी आवास की चारदीवारी का निर्माण भी कराया गया है। इन कार्यों को लेकर निर्माण स्थल पर कार्य से संबंधित बोर्ड लगाए जाने की भी बात कही गई है।
पंचायत समिति मद के इस्तेमाल पर आपत्ति
प्रखंड उप प्रमुख प्रमोद कुमार का आरोप है कि उक्त निर्माण कार्यों में पंचायत समिति मद की राशि का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि पंचायत समिति के लिए निर्धारित मद की राशि का उपयोग उसके निर्धारित क्षेत्राधिकार एवं नियमों के अनुरूप होना चाहिए। नगर पंचायत क्षेत्र में पंचायत समिति मद से निर्माण कार्य कराया जाना पंचायत राज व्यवस्था के प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं, इसकी जांच आवश्यक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पंचायत समिति मद से नगर पंचायत क्षेत्र में निर्माण कराया गया है तो यह वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय है। उप प्रमुख ने संबंधित अभिलेखों, प्रशासनिक स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति तथा भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि पंचायत समिति की राशि के उपयोग में नियमों और क्षेत्राधिकार का पालन किया जाना जरूरी है। ऐसे में नगर पंचायत क्षेत्र में इस मद से कराए गए निर्माण की वैधानिकता और प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए।
डीएम और डीडीसी को भी दी गई प्रतिलिपि
मामले को गंभीर बताते हुए उप प्रमुख ने अपने आवेदन की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, नालंदा एवं उप विकास आयुक्त, नालंदा को भी सौंपी है। इससे मामला अब प्रखंड स्तर से निकलकर जिला प्रशासन के संज्ञान में भी पहुंच गया है। उप प्रमुख ने पूरे मामले की जांच कराकर यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
बीडीओ को लेकर बीपीआरओ ने दी अलग स्थिति
वहीं, इस संबंध में प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (बीपीआरओ) उमेश कुमार ने बताया कि बिहार सरकार के पंचायती राज नियमों के अनुसार पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी की जिम्मेदारी प्रखंड विकास पदाधिकारी को दी गई है। पंचायत समिति के कार्यों का संचालन, पर्यवेक्षण और वित्तीय निगरानी भी कार्यपालक पदाधिकारी के स्तर से की जाती है।
बीपीआरओ ने कहा कि निर्माण कार्य से संबंधित स्वीकृति, राशि के उपयोग और पूरी प्रक्रिया के बारे में बीडीओ ही विस्तृत जानकारी दे सकते हैं। इसलिए इस मामले में अंतिम स्थिति संबंधित अभिलेखों और बीडीओ के स्पष्टीकरण से ही स्पष्ट हो सकेगी।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी नियमसम्मत स्थिति
फिलहाल नगर पंचायत क्षेत्र में पंचायत समिति मद से कराए गए पीसीसी ढलाई और चारदीवारी निर्माण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एक ओर उप प्रमुख ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए जांच की मांग की है, वहीं पंचायती राज विभाग के स्तर से कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारी का हवाला दिया जा रहा है। ऐसे में प्रशासनिक स्वीकृति, योजना की प्रकृति, मद की राशि, क्षेत्राधिकार और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य नियमों के अनुरूप कराया गया है या इसमें किसी प्रकार की वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता हुई है।







