संजय कुमार
पटना (अपना नालंदा)। बिहार सरकार ने राज्य के निजी विद्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और अभिभावकों के हितों की रक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अब निजी स्कूलों में मनमाने शुल्क वसूली, अनावश्यक आर्थिक बोझ और अभिभावकों के शोषण पर प्रभावी रोक लगायी जायेगी। सरकार द्वारा जारी नये निर्देशों के तहत निजी विद्यालयों को सभी प्रकार के शुल्कों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा, ताकि अभिभावकों को पहले से ही यह जानकारी मिल सके कि विद्यालय किस मद में कितनी राशि ले रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी विद्यालय अब पुनर्नामांकन शुल्क, विकास शुल्क अथवा अन्य प्रतिबंधित शुल्क मनमाने ढंग से नहीं वसूल सकेंगे। यदि कोई विद्यालय निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से अभिभावकों की ओर से निजी विद्यालयों द्वारा बढ़ती फीस और अतिरिक्त शुल्कों की शिकायतें मिल रही थीं, जिस पर सरकार ने गंभीरता से निर्णय लिया है।

नई व्यवस्था के अनुसार अब किसी भी निजी विद्यालय को छात्रों एवं अभिभावकों को किसी विशेष दुकान, प्रकाशक या ब्रांड से पुस्तकें, कॉपियां, जूते, बैग अथवा अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिये बाध्य करने की अनुमति नहीं होगी। अभिभावक अपनी सुविधा और आर्थिक क्षमता के अनुसार किसी भी दुकान या विक्रेता से सामग्री खरीद सकेंगे। इसी प्रकार विद्यालय पोशाक को लेकर भी अभिभावकों पर दबाव नहीं बना सकेंगे और वे अपनी पसंद के विक्रेता से निर्धारित डिजाइन की पोशाक खरीद सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी छात्र का शुल्क बकाया रह जाता है, तब भी विद्यालय उसे कक्षा, परीक्षा या परिणाम से वंचित नहीं कर सकेगा, जब तक कि प्रचलित नियमों के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं कर ली जाती। इस फैसले से हजारों अभिभावकों और विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और छात्रहितैषी बनाना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद निजी विद्यालयों की कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ेगी और अभिभावकों का आर्थिक शोषण रुकेगा। राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करेगी ताकि सभी विद्यालय निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करें।







