अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर जीकेसी का भव्य सांस्कृतिक समारोह, कलाकारों ने गीत-संगीत से बांधा समां

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
पटना (अपना नालंदा)। ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (जीकेसी) की कला-संस्कृति इकाई की ओर से सदी के महानायक एवं दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन के जन्मदिन के अवसर पर भव्य सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया गया। समारोह में देश के विभिन्न शहरों से जुड़े कलाकारों ने गीत-संगीत और वादन की शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य अमिताभ बच्चन के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ कलाकारों को मंच प्रदान करना और भारतीय कला-संस्कृति को बढ़ावा देना था।
जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि अमिताभ बच्चन अपनी अभिनय प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और संघर्ष के बल पर भारतीय सिनेमा में विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रहे हैं। उनका लंबा फिल्मी सफर और निरंतर सक्रियता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और समाज में रचनात्मकता एवं आपसी सहयोग की भावना मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जीकेसी की मैनेजिंग ट्रस्टी रागिनी रंजन ने अमिताभ बच्चन को भारतीय सिनेमा की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां कलाकारों की कई पीढ़ियों को प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि जीकेसी का प्रयास देश-विदेश के कलाकारों को एक मंच पर लाकर उनकी प्रतिभा को पहचान दिलाना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाना है।
जीकेसी के ग्लोबल कार्यकारी अध्यक्ष एवं कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के प्रमुख प्रेम कुमार ने समारोह की सफलता पर कलाकारों, अतिथियों, आयोजकों और तकनीकी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं, प्रकोष्ठ के ग्लोबल महासचिव पवन सक्सेना ने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयास और बेहतर समन्वय से कार्यक्रम यादगार बना।
गीत-संगीत की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
समारोह में मुंबई से आईं सा रे गा मा पा विजेता शालिनी बैरागी ने ‘कभी-कभी मेरे दिल में’, गायिका मृणालिनी अखौरी ने ‘तेरे मेरे मिलन की ये रैना’ और जुबिन सिन्हा ने ‘ये क्या हुआ, कब हुआ, कैसे हुआ’ गीत प्रस्तुत किया। नवीन श्रीवास्तव, पटना के कुमार संभव, स्तुति श्रीवास्तव और आशीष कुमार ने भी लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल संगीतमय बना दिया।
भोपाल के अभिषेक माथुर ने माउथ ऑर्गन पर शानदार धुनें बजाईं, जबकि जयपुर के यश माथुर ने ‘ओ साथी रे’ गीत प्रस्तुत किया। तनिष्क श्रीवास्तव ने गिटार वादन से श्रोताओं को प्रभावित किया। चंदन श्रीवास्तव और डॉ. मुक्ति श्रीवास्तव सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के संयोजन में पवन सक्सेना और राष्ट्रीय महासचिव शिवानी गौड़ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी एवं डिजिटल व्यवस्थाओं में आईटी प्रकोष्ठ के नवीन श्रीवास्तव और आशुतोष ब्रजेश ने सहयोग दिया। इस अवसर पर जीकेसी कला-संस्कृति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रंजन कुमार, ग्लोबल उपाध्यक्ष दीपक अभिषेक, राष्ट्रीय महासचिव नवीन कुमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष निलेश रंजन, राष्ट्रीय प्रवक्ता मुकेश महान, समन्वयक अनिल कुमार दास और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संजीव श्रीवास्तव समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
समारोह को रोचक बनाने के लिए प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटकर सांस्कृतिक प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। दोनों टीमें बराबरी पर रहीं। गीत-संगीत और आपसी सहभागिता से भरपूर इस आयोजन ने कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का बेहतर अवसर प्रदान किया।

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