4 महीने से वेतन को तरस रहे नियोजित शिक्षक! लिपिक की मनमानी पर फूटा शिक्षकों का गुस्सा, शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

Written by Sanjay Kumar

Published on:

संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा जिले के प्रारंभिक विद्यालयों में कार्यरत नियोजित शिक्षकों को पिछले चार माह से वेतन नहीं मिलने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने जिला शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए वेतन भुगतान में अनावश्यक विलंब के लिए स्थापना शाखा के एक लिपिक को जिम्मेदार ठहराया है।
संघ के जिलाध्यक्ष रौशन कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जिले के हजारों नियोजित शिक्षक पिछले चार महीनों से वेतन के इंतजार में हैं, जिसके कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की स्थापना शाखा में कार्यरत लिपिक रमाकांत की मनमानी के कारण वेतन भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
रौशन कुमार ने बताया कि शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए आवश्यक उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर महालेखाकार कार्यालय को नहीं भेजा गया। संघ एवं उच्च अधिकारियों के दबाव के बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद वेतन भुगतान की प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई। उनका कहना है कि राज्य सरकार द्वारा 12 जून को ही नियोजित शिक्षकों के वेतन मद में राशि जिला को उपलब्ध करा दी गई थी, फिर भी अब तक भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि अन्य जिलों में आवंटन प्राप्त होने के एक-दो दिनों के भीतर शिक्षकों के खातों में वेतन भेज दिया गया, जबकि नालंदा में अब भी शिक्षकों को इंतजार करना पड़ रहा है। जिलाध्यक्ष के अनुसार जब संबंधित लिपिक से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उनके द्वारा एक सप्ताह और समय लगने की बात कही गई।
शिक्षक संघ ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा कार्यालय में कई महत्वपूर्ण कार्यों में अनावश्यक देरी की जा रही है। संघ का कहना है कि यदि वेतन संबंधी कार्यों का निष्पादन समयबद्ध तरीके से किया जाए तो शिक्षकों को इस प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में पर्दे के पीछे कई तरह की अनियमितताएं चल रही हैं, जिससे आम शिक्षक परेशान हैं।
रौशन कुमार ने बताया कि शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए संघ की ओर से कई बार जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र देकर बैठक आयोजित करने की मांग की गई, लेकिन अब तक सकारात्मक पहल नहीं की गई। उनका कहना है कि शिक्षकों की समस्याओं को सुनने और उनका समाधान करने में विभागीय अधिकारियों की रुचि नहीं दिख रही है।
उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही नियोजित शिक्षकों के लंबित वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो संघ आंदोलनात्मक कदम उठाने पर विचार करेगा। साथ ही जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यशैली तथा शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के संबंध में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को विस्तृत शिकायत भेजी जाएगी।
संघ ने सरकार से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर शिक्षकों के लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए, ताकि हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

Leave a Comment