पटना (अपना नालंदा)। मगही भाषा मगध की सांस्कृतिक विरासत है और इसे उचित सम्मान मिलना चाहिए। ये बातें बिहार सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद चन्द्रवंशी ने कहीं। कोलकाता आगमन के दौरान मगही मगध नागरिक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पारस कुमार सिंह ने उनसे मुलाकात कर मगही भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने सहित पांच सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान मंत्री डॉ. प्रमोद चन्द्रवंशी ने संघ की मांगों को जायज बताते हुए कहा कि वे इस विषय पर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने मगही भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के आंदोलन में हरसंभव सहयोग करने का भी प्रयास करने की बात कही।
मगही मगध नागरिक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पारस कुमार सिंह ने बताया कि मंत्री डॉ. चन्द्रवंशी कोलकाता में विभिन्न पूजा पंडालों के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान उनसे मुलाकात कर मगही भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग रखी गई।

उन्होंने कहा कि मगही भाषा मगध क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई पहचान है। इस भाषा में लोकगीत, लोककथाएं, साहित्य और परंपराओं का विशाल भंडार मौजूद है। इसके बावजूद मगही को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। संघ इस दिशा में लगातार आंदोलन चला रहा है।
पारस कुमार सिंह ने कहा कि मगही को संवैधानिक मान्यता दिलाने के उद्देश्य से मगही मगध नागरिक संघ मगध क्षेत्र के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से संपर्क कर उनका समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहा है। इस अभियान में कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सहयोग मिल रहा है। संघ का लक्ष्य मगही भाषा को उसका उचित सम्मान और संवैधानिक पहचान दिलाना है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जनप्रतिनिधियों के सहयोग और सामूहिक प्रयासों से मगही भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग को मजबूती मिलेगी। इसके लिए आंदोलन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।
इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के जेडीयू नेता अनिल सिंह, भाजपा के औरंगाबाद जिला अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह और समाजसेवी संजय सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान मगही भाषा की पहचान, संरक्षण और संवैधानिक मान्यता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।







