पेवर ब्लॉक और पीसीसी ढलाई में गड़बड़ी का आरोप, मेला क्षेत्र से बाहर भी कराए गए कार्य
सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप, नगर परिषद की कार्यशैली पर उठे सवाल
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। राजगीर में आयोजित मलमास मेला 2026 के सफल समापन के बाद अब मेला की तैयारियों के दौरान कराए गए विकास कार्यों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नगर परिषद राजगीर द्वारा मेला क्षेत्र में कराए गए पेवर ब्लॉक एवं पीसीसी ढलाई कार्यों में अनियमितता और वित्तीय गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। नगर परिषद के वरीय वार्ड पार्षद एवं पूर्व उपमुख्य पार्षद डॉ. अनिल कुमार ने इन कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है।
डॉ. अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि मलमास मेला के लिए जिला प्रशासन की स्वीकृति से नगर परिषद द्वारा विभिन्न विकास योजनाओं का क्रियान्वयन कराया गया था। इन योजनाओं का उद्देश्य मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना था। लेकिन कुछ अधिकारियों और संवेदकों की मिलीभगत से मेला क्षेत्र से बाहर भी कई कार्यों को योजना में शामिल कर सरकारी राशि का उपयोग किया गया।
उन्होंने कहा कि वार्ड संख्या-20 स्थित सरकारी बस स्टैंड के समीप एक ऐसे क्षेत्र में पेवर ब्लॉक लगाया गया है, जो मलमास मेला परिक्षेत्र में शामिल नहीं है। आरोप है कि यह कार्य किसी खास व्यक्ति को लाभ पहुंचाने की मंशा से कराया गया। इसके अतिरिक्त कई स्थानों पर पीसीसी ढलाई ऐसे क्षेत्रों में कराई गई है, जहां इसकी तत्काल आवश्यकता नहीं थी। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया।
डॉ. कुमार ने कहा कि जब उन्होंने इस संबंध में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया तो उन्होंने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही। उन्होंने इसे प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी का उदाहरण बताते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से विकास कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन संबंधित अधिकारी यदि उनकी जानकारी से अनभिज्ञ हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मलमास मेला जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन के नाम पर स्वीकृत योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरत वाले क्षेत्रों को मिलने के बजाय अन्य स्थानों पर पहुंचाया गया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला हो सकता है। इसलिए पूरे मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जानी चाहिए।
वरीय वार्ड पार्षद ने जिला पदाधिकारी से मांग की है कि मेला मद से कराए गए सभी निर्माण कार्यों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा वरीय प्रशासनिक अधिकारियों से कराई जाए। साथ ही कार्यों की गुणवत्ता, प्राक्कलन, स्थल चयन एवं भुगतान प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स से प्राप्त धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुरूप होना चाहिए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, इस संबंध में नगर परिषद प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।







