संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संवाद एवं आगामी कार्ययोजना को लेकर रविवार को कर्पूरी भवन टाउन हॉल, बिहारशरीफ में ‘शिक्षा संवाद सह शिक्षक समागम’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जन सुराज के संस्थापक एवं सूत्रधार प्रशांत किशोर तथा पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षाविद् एवं शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों की समस्याओं, अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति और बिहार में बेहतर एवं जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना था। जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से हजारों शिक्षकों की भागीदारी रही।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के विकास की बुनियाद शिक्षा, रोजगार और बेहतर प्रशासन पर टिकी है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को समाज और आने वाली पीढ़ियों के निर्माण में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल नीतियां बनाने से संभव नहीं है। इसके लिए शिक्षकों को सम्मान, बेहतर कार्य परिस्थितियां और उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है।
उन्होंने नालंदा की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार कभी पूरी दुनिया में शिक्षा और ज्ञान के केंद्र के रूप में जाना जाता था। आवश्यकता है कि बिहार फिर से शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा हासिल करे। उन्होंने शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए निरंतर संवाद तथा लोकतांत्रिक भागीदारी पर जोर दिया।
वहीं डॉ. दिव्या ज्योति ने शिक्षक अधिकारों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा सुरक्षा, पारदर्शी प्रोन्नति एवं स्थानांतरण व्यवस्था, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा, लंबित भुगतान और सम्मानजनक कार्य वातावरण की आवश्यकता बताई।

उन्होंने विशेष रूप से वित्तरहित शिक्षकों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्षों से सीमित संसाधनों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाले शिक्षकों को दया नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों का केवल पाठ्यक्रम पूरा नहीं कराता, बल्कि उनके चरित्र और भविष्य का निर्माण करता है। ऐसे में शिक्षक का अपना भविष्य भी सुरक्षित होना चाहिए।
डॉ. ज्योति ने महिला शिक्षकों के अधिकारों तथा छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बेटियां निर्भय होकर स्कूल और कॉलेज जा सकें, इसके लिए सरकार और समाज दोनों को जिम्मेदारी निभानी होगी।
उन्होंने शिक्षक हित में वेतन, लंबित भुगतान, सेवा एवं सामाजिक सुरक्षा, पारदर्शी प्रोन्नति-स्थानांतरण, महिला शिक्षकों के अधिकार तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता बताया।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का प्रतिनिधि केवल सदन में सवाल उठाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि सदन के बाहर भी शिक्षक समाज के साथ खड़ा रहना चाहिए। कार्यक्रम में पूर्व एमएलसी डॉ. प्रो. रामबली, सह-प्रभारी डॉ. प्रो. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, जन सुराज के पदाधिकारी, प्राचार्य, शिक्षक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।







