नालंदा विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग का विस्तार, एक सप्ताह में तीन अहम एमओयू

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार

बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा विश्वविद्यालय ने अकादमिक, शोध एवं सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए महज एक सप्ताह के भीतर भारत, हंगरी और मैक्सिको के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ तीन महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों से विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अकादमिक नेटवर्क का विस्तार होने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान, बौद्ध अध्ययन, बौद्धिक संपदा अधिकार, सांस्कृतिक विरासत, संयुक्त शोध और विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान के नए अवसर विकसित होंगे।

विश्वविद्यालय द्वारा किए गए इन तीनों समझौतों में भारत की पारंपरिक ज्ञान परंपराओं को आधुनिक शोध एवं शिक्षा से जोड़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान-विनिमय को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य राजगीर स्थित अपने परिसर को विभिन्न देशों और संस्थानों के बीच विचार, ज्ञान, संस्कृति एवं शोध के संवाद का प्रभावी केंद्र बनाना है।

सीएसआईआर-टीकेडीएल के साथ पारंपरिक ज्ञान पर समझौता

30 सितंबर 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय ने सीएसआईआर-ट्रेडिशनल नॉलेज डिजिटल लाइब्रेरी (CSIR-TKDL) यूनिट के साथ पारंपरिक ज्ञान, बौद्धिक संपदा अधिकार, जन-अधिकार और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर सहयोग के लिए एमओयू किया।

एमओयू पर नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और CSIR-TKDL यूनिट की प्रमुख डॉ. विश्वजननी जे. सत्तिगेरी ने राजगीर स्थित विश्वविद्यालय परिसर में हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के तहत दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त शोध एवं अकादमिक गतिविधियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विद्यार्थियों की इंटर्नशिप, ज्ञान-विनिमय तथा अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों और भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं के दस्तावेजीकरण एवं अध्ययन के क्षेत्र में भी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

विशेष रूप से बिहार और देश के विभिन्न हिस्सों में पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के अध्ययन तथा संरक्षण की दिशा में यह साझेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हंगरी के धर्मा गेट बुद्धिस्ट कॉलेज के साथ अकादमिक साझेदारी

इसी दिन नालंदा विश्वविद्यालय ने बुडापेस्ट, हंगरी स्थित धर्मा गेट बुद्धिस्ट कॉलेज के साथ भी अकादमिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक और शोध सहयोग के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किया।

इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त शोध पर्यवेक्षण, शिक्षण कार्यक्रम, पोस्ट-डॉक्टोरल शोध, सम्मेलन एवं संगोष्ठियों के आयोजन, अकादमिक प्रकाशन तथा शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान की संभावनाएं विकसित की जाएंगी।

यह सहयोग विशेष रूप से बौद्ध अध्ययन तथा भारत से जुड़ी व्यापक बौद्धिक और सांस्कृतिक परंपराओं के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संवाद को मजबूत करने में सहायक होगा। नालंदा की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा और बौद्ध दर्शन से जुड़े अध्ययन को यूरोपीय अकादमिक संस्थानों तक पहुंचाने का अवसर भी इस साझेदारी से मिलेगा।

मैक्सिको के ग्युरेरो विश्वविद्यालय के साथ बढ़ेगा अकादमिक संवाद

इससे पहले 24 सितंबर 2026 को नालंदा विश्वविद्यालय ने मैक्सिको के ग्युरेरो राज्य स्थित यूनिवर्सिदाद ऑटोनोमा द गेरेरो (ग्युरेरो का स्वायत्त विश्वविद्यालय) के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किया था।

यह समझौता भारत और मैक्सिको के बीच उच्च शिक्षा एवं अकादमिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत विद्यार्थियों और शिक्षकों के आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाओं, सेमिनार एवं सम्मेलनों के आयोजन तथा अकादमिक जानकारी और शोध प्रकाशनों के आदान-प्रदान के अवसर विकसित किए जाएंगे।

एमओयू के लिए आयोजित ऑनलाइन हस्ताक्षर समारोह में दोनों विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ मैक्सिको स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

3 और 4 अक्टूबर को ‘कला, कौशल और सहभागिता’ कार्यशाला

अकादमिक सहयोग के साथ-साथ नालंदा विश्वविद्यालय स्थानीय ज्ञान, कला एवं सामुदायिक सहभागिता को भी उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी क्रम में विश्वविद्यालय परिसर में 3 और 4 अक्टूबर 2026 को ‘कला, कौशल और सहभागिता’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी।

इस कार्यशाला का आयोजन भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR), क्षेत्रीय कार्यालय पटना द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय एवं उसके सहभागिता साझेदारों के सहयोग से किया जा रहा है।

कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के अलावा कलाकारों, शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों की भागीदारी होगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्थानीय एवं पारंपरिक ज्ञान, कला, शिल्प और स्थिरता के बीच संबंधों को समझने का अवसर देना है।

कार्यशाला के दौरान बांस, मिट्टी, पुआल और जूट जैसी स्थानीय सामग्रियों के उपयोग, पारंपरिक निर्माण तकनीकों, पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण से संबंधित व्यावहारिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इससे विद्यार्थी स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को आधुनिक रचनात्मकता, नवाचार और स्थिरता की अवधारणाओं से जोड़ सकेंगे।

स्थानीय ज्ञान को वैश्विक अकादमिक संवाद से जोड़ने की पहल

नालंदा विश्वविद्यालय द्वारा एक सप्ताह के भीतर किए गए तीन एमओयू और आयोजित होने वाली कार्यशाला को विश्वविद्यालय के अकादमिक एवं सांस्कृतिक विस्तार की व्यापक पहल के रूप में देखा जा सकता है। इन साझेदारियों के माध्यम से पारंपरिक एवं स्थानीय ज्ञान को आधुनिक शोध, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।

इन समझौतों से शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए विभिन्न देशों के संस्थानों के साथ मिलकर अध्ययन एवं शोध करने के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही संयुक्त सेमिनार, सम्मेलन, प्रकाशन, प्रशिक्षण और अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार मिलने की संभावना है।

नालंदा की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा से प्रेरित विश्वविद्यालय राजगीर स्थित अपने परिसर को ऐसा जीवंत अकादमिक केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक वैश्विक शोध के बीच संवाद स्थापित हो सके। भारत, यूरोप और लैटिन अमेरिका के संस्थानों के साथ विकसित हो रहे ये संबंध विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अकादमिक जुड़ाव को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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