आरटीई की प्रतिपूर्ति के लिए निजी विद्यालयों का आंदोलन, अभिभावकों ने उठाए सवाल

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। निजी विद्यालयों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत नामांकित विद्यार्थियों की प्रतिपूर्ति राशि छह वर्षों से लंबित रहने को लेकर निजी विद्यालय संघ एवं चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों में नाराजगी है। रविवार को हिलसा अनुमंडल क्षेत्र के भतहर स्थित एक निजी स्कूल के सभागार में संघ की बैठक हुई। अध्यक्षता अध्यक्ष संजय कुमार ने की, जबकि संचालन सचिव संजय कुमार प्रभाकर ने किया।


बैठक में विद्यालय संचालकों ने कहा कि वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक आरटीई के तहत नामांकित बच्चों की प्रतिपूर्ति राशि विद्यालयों को अब तक नहीं मिली है। इसके कारण निजी विद्यालय आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे हैं। संचालकों का कहना था कि सीमित संसाधनों के बावजूद वे आरटीई के तहत नामांकित बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि लंबित प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान के लिए शिक्षा विभाग को 31 अक्टूबर तक का समय दिया जाएगा। इसके विरोध में 23 सितंबर को हिलसा अनुमंडल क्षेत्र के सभी निजी विद्यालय बंद रखने का निर्णय लिया गया। संघ ने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि तक राशि का भुगतान नहीं होने पर विभागीय कार्यों में सहयोग नहीं करने और आरटीई के तहत बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने को लेकर भी कड़ा निर्णय लिया जाएगा।


विद्यालय संचालकों ने यू-ट्रस पोर्टल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि वर्ग एक से आठ तक नया नामांकन करने, ड्रॉप बॉक्स में बच्चों को जोड़ने तथा विद्यार्थियों के विवरण में सुधार करने की सुविधा निजी विद्यालयों को मिलनी चाहिए। विद्यालय पंजीकरण की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष करने तथा अलग-अलग पोर्टल पर जानकारी दर्ज कराने के बजाय सभी सुविधाएं एक ही पोर्टल पर उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। आरटीई के तहत नामांकित बच्चों के लिए आधार की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाया गया।
वहीं, निजी विद्यालयों की मांगों के बीच अभिभावकों और छात्रों की समस्याओं को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय संचालक अपनी आर्थिक समस्याओं और प्रतिपूर्ति राशि की मांग को प्रमुखता से उठाते हैं, लेकिन बच्चों और अभिभावकों से जुड़ी परेशानियों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि निजी विद्यालयों में जूता-मोजा, कॉपी-किताब, ड्रेस समेत अन्य सामग्री विद्यालय से ही खरीदने के लिए दबाव बनाया जाता है और कई बार बाजार की तुलना में अधिक कीमत वसूली जाती है। अभिभावकों का कहना है कि यदि विद्यालय संचालक अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर संगठन के माध्यम से आवाज उठा सकते हैं तो विद्यार्थियों एवं अभिभावकों की समस्याओं के समाधान के लिए भी पारदर्शी व्यवस्था की पहल होनी चाहिए।


संरक्षक उमेश प्रसाद ने कहा कि निजी विद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए सभी विद्यालयों को एकजुट होकर विभाग के समक्ष अपनी मांगें मजबूती से रखनी चाहिए। संघ ने प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक की लंबित प्रतिपूर्ति राशि शीघ्र निर्गत कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया, ताकि विद्यालयों में शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
बैठक में संजय कुमार, सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा, अश्वनी कुमार, अजय कुमार, चंद्रभूषण कुमार आर्य, विजय भास्कर, संजय कुमार वर्मा, संतोष कुमार, महेश प्रसाद, पवन कुमार, रविशंकर कुमार, विजेंद्र शर्मा, सुनील कुमार, राज किशोर प्रसाद, आशु रंजन, विनय कुमार, राजेश कुमार, जितेंद्र कुमार, मृत्युंजय कुमार, संतोष त्रिपाठी, अभय प्रताप, विजय कुमार, अशोक कुमार, विजय ठाकुर, अंकित कुमार, कृष्णा सिंह, राजीव रंजन कुमार, मुकेश कुमार, शशिकांत समेत सैकड़ों निजी विद्यालय संचालक मौजूद थे।

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