चितरंजन कुमार
चंडी (अपना नालंदा)। प्रखंड मुख्यालय स्थित कार्यशाला भवन में बुधवार को पंचायत समिति एवं जीपीडीपी वर्ष 2026-27 की योजनाओं को लेकर पंचायत समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड प्रमुख पिंकू देवी ने की। बैठक में विभिन्न विभागों की ओर से संचालित योजनाओं और विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी सदस्यों के समक्ष रखी गई। वहीं, पंचायतों में योजनाओं के चयन, स्वीकृति, राशि आवंटन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता को लेकर सदस्यों ने कई गंभीर सवाल उठाए। कुछ मुद्दों पर सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति भी बनी रही।
बैठक शुरू होने से पहले विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों ने अपने-अपने विभाग में चल रहे विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति से पंचायत समिति सदस्यों को अवगत कराया। इस दौरान शिक्षा, पेयजल और पंचायत स्तर पर संचालित विकास योजनाओं सहित कई विषयों पर चर्चा हुई। अधिकारियों द्वारा योजनाओं की स्थिति की जानकारी दिए जाने के बाद सदस्यों ने कई मामलों में स्पष्टीकरण की मांग की।

तुलसीगढ़ हाईस्कूल को बनाया गया आदर्श हाईस्कूल
बैठक में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सुमित कुमार ने शिक्षा विभाग की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने सदन को बताया कि तुलसीगढ़ हाईस्कूल को आदर्श हाईस्कूल के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं और विकास कार्यों से संबंधित जानकारी सदस्यों के समक्ष रखी।
सदस्यों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अन्य विषयों पर भी चर्चा की और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों की सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में बेहतर आधारभूत संरचना उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण मिल सकेगा।
खराब चापाकलों का आंकड़ा नहीं बता सका विभाग
बैठक के दौरान पेयजल का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। उप प्रमुख दया यादव ने प्रखंड क्षेत्र में खराब पड़े चापाकलों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पीएचईडी से पंचायतवार खराब चापाकलों की सूची उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी और पेयजल की आवश्यकता को देखते हुए खराब चापाकलों की मरम्मत और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करना जरूरी है।
मामले पर विभागीय अधिकारी प्रखंड क्षेत्र में खराब पड़े चापाकलों की कुल संख्या स्पष्ट रूप से नहीं बता सके। इस पर पंचायत समिति सदस्यों ने नाराजगी जताई। सदस्यों ने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से जुड़े विषय में विभाग के पास स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं होना गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
सदस्यों ने मांग की कि प्रखंड की सभी पंचायतों में खराब पड़े चापाकलों का सर्वे कराया जाए और पंचायतवार सूची तैयार कर अगली बैठक में सदन के समक्ष प्रस्तुत की जाए। साथ ही खराब चापाकलों की मरम्मत की स्थिति और इसके लिए किए जा रहे विभागीय प्रयासों की भी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई।
योजनाओं की पारदर्शिता को लेकर सदन में तीखी बहस
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा पंचायतों में योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में पारदर्शिता को लेकर रहा। पंचायत समिति सदस्यों ने सवाल उठाया कि पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं का चयन किस आधार पर किया जा रहा है और स्वीकृत योजनाओं के लिए कितनी राशि आवंटित की गई है, इसकी स्पष्ट जानकारी सदस्यों को उपलब्ध होनी चाहिए।

पंचायत समिति सदस्य अनिल कुमार ने सदन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तीखी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने बैठक के दौरान कहा, “यह सदन नहीं, नरक है।” उनके इस बयान के बाद सदन का माहौल गर्म हो गया। उन्होंने अपर कार्यपालक पदाधिकारी सह बीपीआरओ पर गंभीर आरोप लगाते हुए योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
अनिल कुमार ने पंचायतवार स्वीकृत योजनाओं और उनके लिए आवंटित राशि का पूरा ब्योरा सदन में रखने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि प्रखंड की प्रत्येक पंचायत में कितनी योजनाएं स्वीकृत की गई हैं, कौन-कौन सी योजनाएं संचालित हो रही हैं और प्रत्येक योजना के लिए कितनी राशि आवंटित की गई है, इसकी स्पष्ट जानकारी जनप्रतिनिधियों को मिलनी चाहिए।
पंचायतवार योजनाओं का ब्योरा उपलब्ध कराने की मांग
बैठक में मौजूद सदस्यों ने कहा कि पंचायत समिति की बैठक केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। विकास योजनाओं के चयन से लेकर उनके क्रियान्वयन और भुगतान तक की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि जनप्रतिनिधियों और आम लोगों को योजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके।
सदस्यों ने मांग की कि वर्ष 2026-27 के लिए पंचायतवार स्वीकृत योजनाओं की सूची, योजना की लागत, आवंटित राशि और कार्य की वर्तमान स्थिति का विवरण तैयार कर सदन में उपलब्ध कराया जाए। इससे योजनाओं की निगरानी करने में जनप्रतिनिधियों को सुविधा होगी और विकास कार्यों में जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
आंकड़े स्पष्ट नहीं होने पर सदस्यों में नाराजगी
बैठक में कई सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी विभाग के पास अपनी योजनाओं और सुविधाओं से संबंधित अद्यतन आंकड़े स्पष्ट रूप से उपलब्ध होने चाहिए। विशेष रूप से पेयजल, शिक्षा और पंचायत स्तर की विकास योजनाओं से जुड़े आंकड़ों में किसी प्रकार की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए।
सदस्यों ने कहा कि यदि योजनाओं की जानकारी पंचायतवार उपलब्ध रहेगी तो जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में चल रहे कार्यों की बेहतर निगरानी कर सकेंगे। इससे योजनाओं में दोहराव, अनावश्यक खर्च और संभावित अनियमितताओं पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
बैठक के दौरान उठे सवालों से स्पष्ट हुआ कि पंचायत समिति सदस्य अब विकास योजनाओं की जानकारी और क्रियान्वयन में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। सदस्यों ने कहा कि जनता के पैसे से संचालित होने वाली योजनाओं की जानकारी जनता के प्रतिनिधियों को उपलब्ध होना जरूरी है।
बैठक में पेयजल, शिक्षा और पंचायतों की विकास योजनाओं से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद पंचायतवार आंकड़े और योजनाओं की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने की मांग जोरदार तरीके से सामने आई। सदस्यों ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। यदि योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में अनियमितता या अस्पष्टता सामने आती है तो जनप्रतिनिधि इसका विरोध जारी रखेंगे।







