राजगीर के ब्रह्मकुंड में मिले प्राचीन अवशेष, जलस्रोतों के संरक्षण पर डीएम सख्त; ASI जांच और अवैध बोरिंग पर रोक

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा की जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक के बाद राजगीर स्थित ऐतिहासिक एवं पवित्र ब्रह्मकुंड परिसर का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परिसर में चल रहे विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जनेऊ भवन के फाउंडेशन की खुदाई में कुछ प्राचीन पुरावशेष (आर्टिफैक्ट) मिले हैं, जिनके ऐतिहासिक महत्व की संभावना है। जिलाधिकारी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को पत्र भेजकर अवशेषों की जांच कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यदि जांच में स्थल का पुरातात्विक महत्व प्रमाणित होता है तो नियमानुसार क्षेत्र एएसआई को सौंप दिया जाएगा, अन्यथा विकास कार्य पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार जारी रहेगा।
दौरे के दौरान स्थानीय नागरिकों ने ब्रह्मकुंड क्षेत्र की प्राकृतिक जलधाराओं के लगातार सूखने की समस्या भी उठाई। लोगों ने बताया कि आसपास अंधाधुंध निजी बोरिंग के कारण भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे वर्षों से बहने वाले प्राकृतिक जलस्रोत प्रभावित हुए हैं।
इस पर जिलाधिकारी ने जलस्रोतों के संरक्षण के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया, जो वैज्ञानिक आधार पर कारणों की जांच करेगी। साथ ही प्रभावी कार्रवाई के लिए अलग एक्शन कमेटी भी बनाई जाएगी। उन्होंने नगर आयुक्त को कुंडों के आसपास सभी अवैध बोरिंग पर तत्काल रोक लगाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

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