निजी विद्यालयों पर शोषणकारी नीतियां बंद करे सरकार, अन्यथा होगा राज्यव्यापी आंदोलन: भारतीय स्वतंत्र शिक्षण संघ

Written by Sanjay Kumar

Published on:

संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। भारतीय स्वतंत्र शिक्षण संघ, नालंदा की जिला आमसभा रविवार को भगवान बुद्ध हाई स्कूल, कल्याणपुर (बिहारशरीफ) में आयोजित की गई। बैठक में जिले के सैकड़ों निजी विद्यालय संचालकों ने भाग लिया और निजी विद्यालयों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए सरकार एवं शिक्षा विभाग की नीतियों पर गहरी चिंता और रोष व्यक्त किया। आमसभा में सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए तथा सरकार से अविलंब समस्याओं के समाधान की मांग की गई।


बैठक में नए निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति, पूर्व से संचालित विद्यालयों के नवीनीकरण, आरटीई के तहत लंबित प्रतिपूर्ति राशि, यू-डायस से संबंधित समस्याएं, शिक्षा विभाग द्वारा लगातार कराई जा रही जांच, व्यावसायिक बिजली बिल, नगर निगम द्वारा लगाए जा रहे व्यावसायिक टैक्स सहित कई मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य में निजी विद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, लेकिन सरकार और शिक्षा विभाग का रवैया लगातार शोषणकारी होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना काल के बाद से निजी विद्यालयों पर एक के बाद एक जांच बैठाई जा रही है। एक जांच पूरी भी नहीं होती कि दूसरी शुरू हो जाती है। इससे विद्यालयों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
आमसभा में सर्वसम्मति से यह मांग उठाई गई कि निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति संबंधी नियमों को राज्य के अधिकांश विद्यालयों की परिस्थितियों के अनुरूप सरल बनाया जाए। साथ ही पूर्व से प्रस्वीकृत विद्यालयों का नवीनीकरण करते हुए इसकी अवधि सात वर्ष निर्धारित की जाए, ताकि विद्यालय संचालकों को बार-बार प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना नहीं करना पड़े।
बैठक में आरटीई अधिनियम के तहत संचालित निजी विद्यालयों पर व्यावसायिक बिजली दर एवं नगर निगम द्वारा लगाए जा रहे व्यावसायिक कर का भी कड़ा विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कक्षा आठ तक संचालित अधिकांश निजी विद्यालय ट्रस्ट अथवा प्रबंधन समिति द्वारा संचालित किए जाते हैं और उन्हें व्यावसायिक श्रेणी से बाहर रखा गया है। इसके बावजूद व्यावसायिक बिजली बिल और टैक्स वसूला जाना पूरी तरह गैरकानूनी एवं शोषणकारी है, जिसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
संघ ने सरकार से मांग की कि निजी विद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ शीघ्र बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए तथा ऐसी नीतियों और नियमों में संशोधन किया जाए, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की तो बिहार के निजी विद्यालय सामूहिक रूप से राज्यव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
आमसभा में भारतीय स्वतंत्र शिक्षण संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह कार्य प्रभारी (नालंदा) भारत मानस, जिलाध्यक्ष मो. जाहिद अनवर, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. शिवकुमार प्रसाद सिन्हा, सचिव रंजीत कुमार सहित जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों एवं सैकड़ों विद्यालय संचालकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में अरविंद प्रसाद, अजय कुमार, विकास कुमार, अमित कुमार, रुदल प्रसाद सिंह, प्रमोद पांडेय, निशिकांत प्रसाद, सैफ अहमद अंसारी, राजेश्वर प्रसाद, अमल प्रसाद महतो, अभय राज, रंजन कुमार दुबे, डी.एन. पांडेय, रवि रंजन, कौशल किशोर कर्ण, गौतम कुमार, नीरज कुमार, शिव शरण सिन्हा, स्मित बब्बर, चंद्र भूषण प्रसाद, बृजेश कुमार, सचिन कुमार, राहुल कुमार, प्रवेश कुमार पंडित, डॉ. पारसनाथ, गंगासागर, राजन सिन्हा, उपेंद्र कुमार सिंह, विवेक कुमार, विजय कुमार, अर्जुन कुमार, प्रीतम पांडेय, अभय भूषण प्रसाद, रविराज, नितेश कुमार, मृत्युंजय कुमार, विभास कुमार, देवनाथ झा, ई. अली अहमद, धर्मेंद्र कुमार, श्रीमती संगीता कुमारी, अरुण कुमार तथा संगठन की संरक्षिका श्रीमती रेखा भारती सहित बड़ी संख्या में निजी विद्यालय संचालक उपस्थित रहे।
बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि निजी विद्यालयों के हितों की रक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के संरक्षण के लिए संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगा।

Leave a Comment