सिलाव में शांति और भाईचारे के साथ संपन्न हुआ मोहर्रम, समाजसेवी राजेश कुमार गौतम ने प्रशासन व नागरिकों को दी बधाई

Written by Sanjay Kumar

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नालंदा (अपना नालंदा)। नालंदा जिले के सिलाव नगर पंचायत क्षेत्र के कड़ाह बाजार में मोहर्रम का तीन दिवसीय पर्व पूरी शांति, आपसी सौहार्द और भाईचारे के वातावरण में संपन्न हो गया। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा, जिसके कारण कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। शांतिपूर्ण माहौल में पर्व संपन्न होने पर स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली की सराहना की।
पर्व के दौरान सिलाव थाना अध्यक्ष, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), अंचल अधिकारी (सीओ) तथा अनुमंडल स्तर के अधिकारियों ने लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रखी। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती और नियमित गश्त के कारण पूरे आयोजन में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही। प्रशासन की सतर्कता और आम लोगों के सहयोग से मोहर्रम का जुलूस एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।


समाजसेवी एवं सिलाव संवाददाता राजेश कुमार गौतम ने मोहर्रम के सफल आयोजन पर सिलाव थाना अध्यक्ष सहित सभी प्रशासनिक अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सक्रियता और बेहतर समन्वय के कारण पूरा पर्व सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि किसी भी त्योहार की सफलता प्रशासन और आम नागरिकों के आपसी सहयोग पर निर्भर करती है और सिलाव ने इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
उन्होंने सभी मुस्लिम भाइयों को मोहर्रम की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहजीब और विविधता में एकता की संस्कृति है। चाहे हिंदू समाज का पर्व हो, मुस्लिम समाज का, ईसाई समाज का या बौद्ध समाज का, हर त्योहार प्रेम, सद्भाव, सामाजिक समरसता और इंसानियत का संदेश देता है। जब सभी समुदाय मिल-जुलकर एक-दूसरे के पर्व में सहभागी बनते हैं, तो सामाजिक एकता और अधिक मजबूत होती है।
राजेश कुमार गौतम ने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए बताया कि पहले ताजिया श्रद्धालुओं द्वारा कंधों पर उठाकर ले जाया जाता था। उस समय बच्चे और बड़े श्रद्धापूर्वक ताजिया के नीचे से गुजरते थे। बुजुर्गों की मान्यता थी कि ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति, मंगल और शुभ फल की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि समय के साथ व्यवस्थाओं में बदलाव आया है और अब कई स्थानों पर ताजिया ट्रैक्टर-ट्रॉली पर ले जाया जाता है, लेकिन लोगों के बीच प्रेम, सम्मान और भाईचारे की भावना आज भी पहले की तरह कायम है।
उन्होंने कहा कि मोहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि त्याग, इंसानियत, सामाजिक समरसता और आपसी सम्मान का भी प्रतीक है। इस अवसर पर विभिन्न समुदायों के लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, शुभकामनाएं देते हैं और समाज में प्रेम व सद्भाव का संदेश फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है, जिसे हर हाल में बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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