नालंदा विश्वविद्यालय में युवा कवयित्री जोएल गुहा की पुस्तक ‘स्कैटर’ का भव्य लोकार्पण

Written by Sanjay Kumar

Published on:

विजय प्रकाश उर्फ पिन्नू
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा विश्वविद्यालय में पहली बार आयोजित ‘शास्त्रार्थ 2026’ कार्यक्रम एक ऐतिहासिक और साहित्यिक क्षण का साक्षी बना। इस विशेष आयोजन के दौरान 22 वर्षीय युवा कवयित्री जोएल गुहा के तीसरे कविता संग्रह ‘स्कैटर’ का भव्य लोकार्पण किया गया। पुस्तक का विमोचन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने कुलसचिव डॉ. रमेश प्रताप सिंह परिहार एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में किया।
वर्तमान में नालंदा विश्वविद्यालय में वर्ल्ड लिटरेचर विषय से मास्टर्स कर रहीं जोएल गुहा का यह कविता संग्रह केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि गहरी संवेदनाओं और आत्मिक अनुभवों का दस्तावेज माना जा रहा है। जोएल के अनुसार ‘स्कैटर’ आत्मा की घर वापसी जैसा अनुभव कराता है, जिसमें प्रेम, संवेदना और आत्मचिंतन के भाव समाहित हैं। पुस्तक में शामिल कविताओं को फोटोग्राफर शाहरुख खान द्वारा खींची गई तस्वीरों ने और प्रभावशाली बना दिया है। कवर पेज से लेकर पुस्तक के अंदर तक प्रयुक्त चित्र कविताओं की भावनाओं को नया आयाम देते हैं।


विमोचन समारोह में एसएलएलएच के डीन प्रो. वेंकट राव, डॉ. मीर, डॉ. स्मिता सिंह, डॉ. श्रीशा उडुपा, प्रसिद्ध इतिहासकार के.टी.एस. सराओ तथा एसबीएसपीसीआर के डीन प्रो. गोदाबरिश मिश्र समेत कई वरिष्ठ शिक्षाविद उपस्थित रहे।
मूल रूप से बिहार के पूर्णिया जिले से संबंध रखने वाली जोएल गुहा की साहित्यिक यात्रा बचपन से ही शुरू हो गई थी। प्रारंभिक शिक्षा सिलीगुड़ी में प्राप्त करने वाली जोएल ने मात्र 15 वर्ष की उम्र में अपनी पहली कविता पुस्तक ‘स्टिचेस’ लिखी थी। यह पुस्तक शांतिनिकेतन से प्रकाशित हुई और कोलकाता के ऑक्सफोर्ड में इसका विमोचन किया गया था।
इसके बाद उन्होंने लखनऊ के जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल में अध्ययन के दौरान दूसरी पुस्तक ‘ऑटम एंड द रेन’ लिखी। वर्ष 2021 में लखनऊ राष्ट्रीय पुस्तक मेले में तत्कालीन पुलिस आयुक्त डी.के. ठाकुर ने इस पुस्तक का विमोचन किया था।
जोएल अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां अपर्णा गुहा के प्रोत्साहन और पिता, आयकर उपायुक्त संदीप गुहा के विश्वास को देती हैं। उन्हें लेखन के क्षेत्र में ‘सिलभद्र वाद कौशल सम्मान’ भी मिल चुका है, जो उन्हें पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के हाथों प्राप्त हुआ था।
हाल ही में पूर्णिया में आयोजित ‘ज्ञान संगम 2026’ में भी उन्हें युवा कवयित्री के रूप में विशेष सम्मान मिला। भविष्य में जोएल कोसी क्षेत्र की हिंदी और बांग्ला साहित्यिक कृतियों का अंग्रेजी में अनुवाद कर उन्हें वैश्विक मंच तक पहुंचाने की योजना पर कार्य कर रही हैं।

Leave a Comment