सरस्वती विद्या मंदिर में बाल संसद शपथ ग्रहण समारोह सम्पन्न, छात्रों ने संभाली नेतृत्व की जिम्मेदारी

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। पूज्य तपस्वी श्री जगजीवन जी महाराज सरस्वती विद्या मंदिर के हसनपुर परिसर में गुरुवार को बाल संसद शपथ ग्रहण समारोह का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा लोकतांत्रिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और जिम्मेदारी के महत्व को समझा।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे वातावरण में अनुशासन, उत्साह और राष्ट्रभावना का माहौल देखने को मिला। समारोह में विद्यालय परिवार के सभी आचार्य, दीदीजी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य कृष्ण कुमार सिन्हा ने बाल संसद की उपयोगिता एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाल संसद छात्रों के सर्वांगीण विकास का एक सशक्त माध्यम है। इससे बच्चों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता तथा सामाजिक जिम्मेदारियों की भावना विकसित होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर इस प्रकार के आयोजन बच्चों को भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं। यदि बचपन से ही उनमें नेतृत्व और सेवा की भावना विकसित की जाए तो वे आगे चलकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। बाल संसद के माध्यम से छात्र विद्यालय की व्यवस्थाओं को समझते हैं तथा सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया से परिचित होते हैं।
समारोह के दौरान उप-प्रधानाचार्य श्री रामजी प्रसाद सिन्हा ने बाल संसद के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री, सेनापति एवं अन्य मंत्रिमंडल के सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान छात्र-छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सभी नवनिर्वाचित सदस्यों ने विद्यालय के अनुशासन, स्वच्छता, शैक्षणिक वातावरण एवं विद्यार्थियों के हितों के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करने का संकल्प लिया।


शपथ ग्रहण के पश्चात विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अनंत कुमार सिन्हा ने अपने संदेश में नवनिर्वाचित बाल संसद सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि किसी भी पद के साथ जिम्मेदारी जुड़ी होती है। इसलिए सभी सदस्य अपने दायित्वों का ईमानदारी, निष्ठा और अनुशासन के साथ निर्वहन करें। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि नेतृत्व का अर्थ केवल अधिकार प्राप्त करना नहीं, बल्कि दूसरों के लिए आदर्श बनना होता है।
प्रधानाचार्य ने कहा कि बाल संसद विद्यालय की एक महत्वपूर्ण इकाई है, जो छात्रों को लोकतांत्रिक व्यवस्था की व्यवहारिक जानकारी प्रदान करती है। इससे बच्चों में टीम भावना और सहयोग की प्रवृत्ति विकसित होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नवगठित बाल संसद विद्यालय की प्रगति और अनुशासन को नई दिशा देगी।

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कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर देशभक्ति और उत्साह के माहौल से गूंज उठा। छात्र-छात्राओं ने अनुशासित ढंग से कार्यक्रम में भाग लेकर विद्यालय की गरिमा को बढ़ाया। समारोह में उपस्थित अभिभावकों एवं शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना की और इसे विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर कार्यक्रम प्रमुख शंभू कुमार सिंह सहित विद्यालय के सभी सम्मानित आचार्य एवं दीदीजी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर नवनिर्वाचित बाल संसद सदस्यों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। पूरे समारोह का संचालन अनुशासित एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। विद्यालय परिवार ने इसे विद्यार्थियों के नेतृत्व विकास और नैतिक शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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