अखिलेंद्र कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।
शहर में फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के साथ उपचार की नई सुविधा उपलब्ध हो गई है। दीपनगर थाना के समीप स्थित डेज फिजियोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर में अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के शारीरिक दर्द और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याओं का उपचार किया जा रहा है। यह केंद्र आयुष्मान डिजिटल मिशन के अंतर्गत हेल्थ फैसिलिटी सेंटर के रूप में पंजीकृत है, जिससे मरीजों को भरोसेमंद और व्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं।
इस अत्याधुनिक केंद्र में फिजियोथेरेपी की आधुनिक मशीनों के माध्यम से जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों के खिंचाव, नसों के दर्द तथा शरीर से संबंधित कई अन्य समस्याओं का इलाज किया जाता है। यहां आई- टेकार और अन्य उन्नत तकनीक वाली मशीनों से उपचार कर मरीजों को राहत दी जा रही है। कई बार सामान्य उपचार से जब दर्द में पर्याप्त सुधार नहीं होता, तब उन्नत तकनीक वाली शॉकवेव थेरेपी का सहारा लिया जाता है।

शॉकवेव थेरेपी को फिजियोथेरेपी के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी उपचार पद्धति माना जाता है। यह एक गैर-आक्रामक विधि है, जिसमें बिना किसी सर्जरी के तेज और लंबे समय से चल रहे दर्द का इलाज किया जाता है। इस प्रक्रिया के माध्यम से शरीर के प्रभावित हिस्सों में विशेष प्रकार की तरंगें भेजी जाती हैं, जिससे रक्त संचार बढ़ता है और क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इसके कारण जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की सूजन और पुरानी चोटों में काफी राहत मिलती है।
इसके अलावा शॉकवेव थेरेपी का उपयोग पुरुषों में होने वाली स्तंभन समस्या के उपचार में भी किया जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इरेक्टाइल डिसफंक्शन आज के समय में पुरुषों के बीच तेजी से बढ़ती समस्या बनती जा रही है। इस स्थिति में पुरुषों को पर्याप्त इरेक्शन प्राप्त करने या उसे बनाए रखने में कठिनाई होती है। इसका मुख्य कारण लिंग में रक्त प्रवाह का कम होना होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें रक्त वाहिकाओं का अवरुद्ध होना, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, धूम्रपान, तनाव, चिंता, पर्याप्त व्यायाम की कमी और अनियमित नींद शामिल हैं। पहले इस समस्या के इलाज के लिए दवाइयों, इंजेक्शन या सर्जरी का सहारा लिया जाता था, लेकिन अब लो-इंटेंसिटी शॉकवेव थेरेपी एक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आई है।
यह उपचार पूरी तरह से गैर-सर्जिकल है और इसमें किसी प्रकार का दर्द या गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होता। चिकित्सकों के अनुसार वैज्ञानिक शोधों में भी यह प्रमाणित हुआ है कि लो-इंटेंसिटी शॉकवेव थेरेपी से रक्त प्रवाह में सुधार होता है और इरेक्टाइल फंक्शन को दोबारा सक्रिय करने में मदद मिलती है।

उपचार की प्रक्रिया भी काफी सरल होती है। एक सत्र लगभग 15 से 20 मिनट का होता है। इसमें मरीज को आराम से लिटाया जाता है, फिर विशेष उपकरण के माध्यम से नियंत्रित शॉकवेव दी जाती है। उपचार के बाद मरीज को कुछ जरूरी सावधानियों और जीवनशैली से संबंधित सुझाव भी दिए जाते हैं, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त हो सके।
डेज फिजियोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर के इस आधुनिक उपचार से बिहारशरीफ और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अब बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की देखरेख में यहां मरीजों को राहत दर पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।







