जैन दर्शन पर वैश्विक मंच पर नालंदा विश्वविद्यालय ने रखा भारतीय ज्ञान का दृष्टिकोण

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)। नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी ने हैदराबाद स्थित कान्हा शांति वनम् में आयोजित ‘द हार्ट ऑफ ए जैन’ अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव में भाग लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा और जैन दर्शन के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया। इस दौरान उन्होंने हार्टफुलनेस के अध्यक्ष एवं विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक मार्गदर्शक पूज्य दाजी (श्री कमलेश डी. पटेल) से शिष्टाचार मुलाकात की और भारतीय ज्ञान परंपरा, मानवीय मूल्यों तथा सतत विकास जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा की।
इस अवसर पर पूज्य दाजी ने प्रो. चतुर्वेदी को अपनी नवीनतम पुस्तक ‘द हार्ट ऑफ जैनिज्म’ की हस्ताक्षरित प्रति भेंट की। अपने संबोधन में प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि भगवान ऋषभदेव की शिक्षाएं आज भी नैतिक नेतृत्व, अहिंसा, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और मानव कल्याण के लिए विश्व को प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक जैन दर्शन की आधुनिक समय में प्रासंगिकता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है।
कुलपति ने नालंदा विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर जैन स्टडीज’ स्थापित करने की परिकल्पना भी साझा की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र भारतीय दर्शन, ज्ञान परंपरा और अंतर्विषयक अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर नई दिशा देगा।
कान्हा शांति वनम् प्रवास के दौरान प्रो. चतुर्वेदी ने हार्टफुलनेस ध्यान सत्र में भाग लिया, सीड साइंस लेबोरेटरी का अवलोकन किया तथा जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर नालंदा विश्वविद्यालय और हार्टफुलनेस के बीच भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और मानव कल्याण के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी।

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