स्कूलों की बदहाल व्यवस्था के खिलाफ भाकपा माले का आंदोलन तेज करने का ऐलान

Written by Sanjay Kumar

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करायपरसुराय (अपना नालंदा)। सरकारी विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, युवाओं के लिए रोजगार की गारंटी, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई पर रोक तथा सामाजिक-आर्थिक असमानता के खिलाफ जनआंदोलन को तेज करने को लेकर भाकपा माले जिला समिति की बैठक करायपरसुराय प्रखंड के बेरथु गांव में आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के राज्य सचिव कामरेड कुणाल एवं मगध जोन प्रभारी कामरेड अमर जी मुख्य रूप से मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के सचिव श्रीनिवास शर्मा ने की।
बैठक में शिक्षा, रोजगार, महंगाई और असमानता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकारें लगातार बेहतर शिक्षा व्यवस्था और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के दावे करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से अलग है। इसी को लेकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में विद्यालयों का सर्वे कराया गया है।

बैठक को संबोधित करते हुए कामरेड कुणाल ने कहा कि बिहार में प्राथमिक शिक्षा से लेकर 10+2 तक की शिक्षा व्यवस्था का आधारभूत ढांचा बेहद कमजोर स्थिति में है। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के साथ-साथ विद्यालयों में जरूरी संसाधनों का भी अभाव है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से नौवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए विषयवार पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं है। कई विद्यालयों में कंप्यूटर और प्रयोगशाला जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा 11वीं और 12वीं की शिक्षा व्यवस्था का भी सर्वे किया गया। इसमें यह बात सामने आई कि कई जगहों पर प्लस-टू की पढ़ाई उत्क्रमित मध्य विद्यालयों के भवनों में ही संचालित हो रही है। इन विद्यालयों में पर्याप्त भवन, विषयवार शिक्षक, कंप्यूटर और प्रयोगशाला जैसी सुविधाओं का गंभीर अभाव है। ऐसे विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के बजाय कई जगह केवल नामांकन, पंजीयन और परीक्षा की औपचारिक प्रक्रिया तक व्यवस्था सीमित होकर रह गई है।
कामरेड कुणाल ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था की इस स्थिति से बिहार के गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय शिक्षा के बाजारीकरण की दिशा में ले जाया जा रहा है। शिक्षा को आम लोगों का अधिकार बनाने के बजाय उसे एक उद्योग और व्यापार का रूप दिया जा रहा है।
उन्होंने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि ‘स्कूल ठीक करो, शिक्षा सुधारो’ अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए। अभिभावकों, विद्यार्थियों और ग्रामीणों के साथ जनसंवाद आयोजित कर उन्हें शिक्षा की मौजूदा स्थिति के प्रति जागरूक किया जाए। इसके बाद विद्यालय स्तर से लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय तक आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाए।

वहीं, मगध जोन प्रभारी कामरेड अमर जी ने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण देश में बेरोजगारी और महंगाई गंभीर समस्या बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि आम लोग रोजगार के अभाव और लगातार बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। कॉरपोरेट पक्षीय नीतियों के कारण समाज में आर्थिक असमानता बढ़ रही है तथा अमीर और अधिक अमीर और गरीब और अधिक गरीब होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई के कारण गरीब, मजदूर, किसान और निम्न आय वर्ग के परिवारों के सामने जीवन-यापन का संकट खड़ा हो रहा है। उन्होंने मजदूरों, किसानों और गरीबों से इन समस्याओं के खिलाफ एकजुट होकर जनआंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया।
बैठक में नेताओं ने रोजगार की गारंटी, चरम बेरोजगारी पर रोक, महंगाई को नियंत्रित करने, बढ़ती आर्थिक असमानता समाप्त करने तथा सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर आंदोलन की आगे की रणनीति पर भी चर्चा की।
इस दौरान पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने तथा आम लोगों को इससे जोड़ने के लिए अपने-अपने सुझाव दिए। रविंद्र पासवान, अरुण यादव, उमेश पासवान, रामधारी दास, दिनेश कुमार यादव, महेंद्र प्रसाद, विरेश कुमार, शत्रुघ्न कुमार, रामदास अकेला, संजय पासवान, प्रमोद यादव, विजय यादव, शैलेश यादव सहित कई पार्टी कमिटी के सदस्यों ने बैठक में अपने विचार रखे।
बैठक में शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर आगामी दिनों में जनसंपर्क और आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया गया।

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