बिहारशरीफ में टोल टैक्स का बड़ा खेल! 56 लाख का ठेका घटकर 28.50 लाख में, फिर भी चालकों से हो रही मनमानी वसूली

Written by Sanjay Kumar

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संजय कुमार
बिहारशरीफ (अपना नालंदा)।बिहारशरीफ नगर निगम में टेम्पो और ई-रिक्शा टोल टैक्स की वसूली को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। एक तरफ बिहार सरकार राजस्व बढ़ाने और विकास कार्यों को गति देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बिहारशरीफ नगर निगम में टोल टैक्स ठेका प्रक्रिया और वसूली व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2026-27 के लिए टेम्पो एवं ई-रिक्शा टोल टैक्स का ठेका पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आधी राशि पर दे दिया गया, जबकि वाहन संख्या और वसूली की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों, वाहन चालकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का माहौल गर्म है।


जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्र में टेम्पो एवं ई-रिक्शा टोल टैक्स वसूली का ठेका लगभग 56 लाख रुपये में दिया गया था। लेकिन वर्ष 2026-27 के लिए यही ठेका मात्र 28 लाख 50 हजार रुपये में आवंटित कर दिया गया। यानी पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आधी राशि पर टेंडर स्वीकृत किया गया। इस निर्णय ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आम तौर पर महंगाई, बढ़ती वाहन संख्या और राजस्व वृद्धि की संभावनाओं को देखते हुए टेंडर राशि में बढ़ोतरी होने की उम्मीद की जाती है, लेकिन यहां इसके विपरीत ठेका राशि में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शहर में टेम्पो और ई-रिक्शा की संख्या बढ़ी है तो राजस्व भी बढ़ना चाहिए था। ऐसे में टेंडर राशि में इतनी बड़ी कमी किस आधार पर की गई, यह जांच का विषय है। कई जानकारों का मानना है कि इस मामले में नगर निगम के कुछ पदाधिकारियों, कर्मचारियों तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
दूसरी ओर वाहन चालकों का आरोप है कि ठेका राशि कम होने के बावजूद वसूली कर्मियों द्वारा निर्धारित दर से अधिक पैसा लिया जा रहा है। चालकों का कहना है कि निगम द्वारा निर्धारित शुल्क और मौके पर वसूले जा रहे शुल्क में बड़ा अंतर है। उनके अनुसार ई-रिक्शा से निर्धारित शुल्क 7 रुपये है, लेकिन वसूली कर्मी 10 रुपये तक वसूल रहे हैं। इसी प्रकार छोटे टेम्पो से निर्धारित 12 रुपये के बजाय 20 रुपये और बड़े टेम्पो से निर्धारित 14 रुपये के बजाय 20 रुपये तक वसूले जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
चालकों का कहना है कि यदि कोई चालक अतिरिक्त राशि देने का विरोध करता है तो उसके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। कई वाहन चालकों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर गाली-गलौज और धमकी तक दी जाती है। उनका कहना है कि रोजाना कमाई का बड़ा हिस्सा टोल टैक्स और अन्य खर्चों में चला जाता है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।
सबसे अधिक शिकायत बिहारशरीफ के अस्पताल चौक स्थित टोल वसूली केंद्र को लेकर सामने आ रही है। यह स्थान जिला मुख्यालय का अत्यंत व्यस्त क्षेत्र माना जाता है, जहां से प्रतिदिन जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक समेत कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी गुजरते हैं। इसके बावजूद कथित रूप से निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। वाहन चालकों का सवाल है कि जब यह गतिविधि सार्वजनिक स्थल पर खुलेआम हो रही है तो जिम्मेदार विभाग इस पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है।
कुछ चालकों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे शिकायत लेकर थाना पहुंचते हैं तो उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रही शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
नगर निगम चुनाव के दौरान भी टेम्पो और ई-रिक्शा टोल टैक्स का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। चालकों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान मेयर प्रतिनिधि मनोज तांती द्वारा टोल टैक्स समाप्त करने का आश्वासन दिया गया था। इसी भरोसे पर बड़ी संख्या में चालकों ने समर्थन दिया था। लेकिन चुनाव के बाद न केवल टोल टैक्स जारी रहा बल्कि कथित रूप से अधिक वसूली की शिकायतें भी बढ़ती गईं। इस कारण वाहन चालकों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि टोल टैक्स समाप्त नहीं किया जा सकता तो कम से कम निर्धारित दरों का सख्ती से पालन कराया जाए।
जानकारों के अनुसार बिहारशरीफ शहर में लगभग 15000 टेम्पो और ई-रिक्शा संचालित हैं। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों से प्रतिदिन होने वाली वसूली को देखते हुए राजस्व का आंकड़ा काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि टेंडर राशि में आई भारी कमी को लेकर लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
समाजसेवी संजय कुमार सिन्हा ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार आर्थिक संसाधनों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है तो नगर निगम को भी राजस्व बढ़ाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि टेंडर राशि में अचानक आई भारी गिरावट से यह संदेह उत्पन्न होता है कि कहीं न कहीं सरकार को संभावित राजस्व हानि पहुंचाई जा रही है। उन्होंने मांग की कि पूरे टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि यदि आवश्यक हो तो वर्तमान टेंडर को रद्द कर पुनः पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नया टेंडर जारी किया जाए। साथ ही टोल वसूली केंद्रों पर निर्धारित शुल्क सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने तथा अधिक वसूली की शिकायतों की जांच कराने की भी मांग की गई है।
फिलहाल टेम्पो और ई-रिक्शा टोल टैक्स को लेकर उठे सवालों ने बिहारशरीफ नगर निगम की कार्यप्रणाली को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है कि इन आरोपों की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है या नहीं।

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